Water Supply Initiative: राप्ती नदी का पानी बुझाएगा गोरखपुर की प्यास

गोरखपुर नगर निगम ने भूजल पर निर्भरता कम करने और राप्ती नदी के पानी से शहर की जलापूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगर निगम की कार्यकार
गोरखपुर नगर निगम ने भूजल पर निर्भरता कम करने और राप्ती नदी के पानी से शहर की जलापूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में चार वार्डों में सरफेस वाटर से जलापूर्ति की पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई। इस परियोजना के तहत राप्ती नदी से जुड़े श्रीराम चौक, बसंतपुर, महर्षि दधीचिनगर और माधोपुर वार्डों का सर्वेक्षण किया जाएगा। सबसे कम लागत वाले वार्ड में इस परियोजना को पहले लागू किया जाएगा। महापौर डा. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई अन्य विकास परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकारिणी सदस्य जिलाउल इस्लाम ने राप्ती नदी के पानी को पेयजल के रूप में लोगों के घरों तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों का समर्थन मिला।
जलकल महाप्रबंधक रघुवेंद्र कुमार ने बताया कि पहले उत्तर प्रदेश जल निगम ने इस योजना का सर्वेक्षण किया था, लेकिन उच्च लागत के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब पायलट परियोजना के रूप में इसकी व्यवहार्यता को परखने का निर्णय लिया गया है। नदी के पानी को पेयजल में बदलने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना होगा, जिसकी प्रति एमएलडी क्षमता के लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एक एमएलडी संयंत्र से लगभग 500 घरों तक जलापूर्ति की जा सकती है। सर्वे रिपोर्ट के बाद परियोजना की लागत, क्षमता और क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की जाएगी। यह परियोजना भूजल दोहन को कम करने और वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
















