Death Sentence in Kushinagar: पत्नी और तीन बेटों की हत्या के आरोपी को फांसी की सजा

कुशीनगर में एक पति को अपनी पत्नी और तीन बेटों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश परमेश्वर प्रसाद की अदालत ने इस मामले में दोषी ज
कुशीनगर में एक पति को अपनी पत्नी और तीन बेटों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश परमेश्वर प्रसाद की अदालत ने इस मामले में दोषी जितेंद्र कुशवाहा को फांसी की सजा के साथ-साथ दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला 26 अगस्त 2021 का है, जब रामजीत कुशवाहा ने कसया थाने में तहरीर दी थी कि जितेंद्र ने धारदार हथियार से अपनी पत्नी लीलावती देवी और उनके तीन बच्चों, आठ वर्षीय आकाश, छह वर्षीय विकास और चार वर्षीय रिंकू की हत्या कर दी। घटना के समय जितेंद्र ने अपने परिवार के चारों सदस्यों की हत्या की और उनके शव को घर में छोड़ दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को बरामद किया और हत्या का मामला दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान, पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार, जो सब्जी काटने वाला था, भी बरामद किया। इस मामले में कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जितेंद्र कुशवाहा को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष के वकीलों, जीपी यादव और संजीव कुमार सिंह ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने जितेंद्र को फांसी की सजा सुनाने के साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। यह मामला कुशीनगर जिले में जघन्य हत्याओं के मामलों में से एक है।
कुशीनगर जनपद में अब तक पांच जघन्य हत्या के मामलों में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से पहली फांसी की सजा 2014 में, दूसरी 2016 में और फिर 2026 में फरवरी तथा 29 मई और 30 जुलाई को दी गई थी। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। इस प्रकार की जघन्य घटनाएं समाज में सुरक्षा के मुद्दों को उठाती हैं और न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में सख्त संदेश देने का कार्य करेगा कि अपराधियों को उनके किए की सजा अवश्य मिलेगी।
















