Agra Fort Restoration: जहांआरा और रोशनआरा महल को मिलेगा नया रूप

आगरा किला, जो अपनी ऐतिहासिकता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, अब एक बार फिर से अपने पुराने वैभव में लौटने के लिए तैयार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की
आगरा किला, जो अपनी ऐतिहासिकता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, अब एक बार फिर से अपने पुराने वैभव में लौटने के लिए तैयार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रसायन शाखा ने जहांआरा और रोशनआरा के महल में मडपैक ट्रीटमेंट का कार्य शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाने की है, जो इन स्मारकों की धवल संगमरमरी सुंदरता को फिर से जीवंत करने में मदद करेगी। धूल कणों और पर्यटकों के स्पर्श के कारण इन स्मारकों पर जो दाग लगे हैं, उन्हें साफ करने से उनकी सुंदरता में निखार आएगा। इस कार्य पर लगभग 12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और यह सितंबर के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है।
आगरा किला में स्थित अंगूरी बाग के खास महल से जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां सटी हुई हैं। इनका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहां ने कराया था। जहांआरा की छतरी महल के उत्तर में है, जबकि रोशनआरा की छतरी दक्षिण में स्थित है। दोनों छतरियों के बाहरी हिस्से में सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया है, जबकि अंदर की तरफ चूने का सफेद प्लास्टर है। छत पर तांबे की प्लेट भी लगी हुई है, जो अब धूल के कारण खराब नजर आ रही है। एएसआई की रसायन शाखा ने इन छतरियों और उनके संगमरमरी अहाते में मडपैक ट्रीटमेंट का काम शुरू किया है, जिससे संगमरमर और प्लास्टर को साफ करने के बाद तांबे की प्लेट का संरक्षण भी किया जाएगा।
जहांआरा और रोशनआरा, शाहजहां और मुमताज की बेटियां थीं। जहांआरा सबसे बड़ी थीं और दाराशिकोह के साथ थीं, जबकि रोशनआरा ने उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब का समर्थन किया था। जहांआरा ने आगरा में जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। मडपैक ट्रीटमेंट की प्रक्रिया में संगमरमर पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाया जाता है, जिसे सूखने दिया जाता है। यह मिट्टी स्मारक की सतह पर जमा धूल कणों को हटाती है और बाद में इसे पानी से धोकर साफ कर दिया जाता है। एएसआई की रसायन शाखा ने इससे पहले भी आगरा किला में मोती मस्जिद और दीवान-ए-आम जैसे अन्य संगमरमर से बने भवनों की सफाई का कार्य किया है।









