Chamayavilakku Festival: कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर में पुरुषों को साड़ी पहनकर ही मिलता है प्रवेश

कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर की परंपरा में पुरुषों को देवी के दर्शन के लिए साड़ी पहनकर और महिलाओं की तरह सज-धजकर जाना अनिवार्य है। यह अनोखी परंपरा भक्ति और आस्था क
कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर की परंपरा में पुरुषों को देवी के दर्शन के लिए साड़ी पहनकर और महिलाओं की तरह सज-धजकर जाना अनिवार्य है। यह अनोखी परंपरा भक्ति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। हर साल आयोजित होने वाले चमायविलक्कू उत्सव के दौरान, देशभर से हजारों श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं। मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं को पैंट, शर्ट या अन्य अनौपचारिक कपड़े पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं है।
श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए साड़ी पहनकर, चेहरे पर मेकअप लगाकर, हाथों में चूड़ियां पहनकर और गजरा लगाकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। इस दौरान अस्थायी ब्यूटी पार्लर और मेकअप स्टॉल भी लगाए जाते हैं, जहां विशेषज्ञ मेकअप आर्टिस्ट पुरुषों को साड़ी बांधने और सजने में मदद करते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं के बीच बहुत लोकप्रिय है और वे इसे पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।
इस अनोखी प्रथा के पीछे एक दिलचस्प लोककथा है। कहा जाता है कि पहले कुछ चरवाहे लड़के लड़कियों के वेश में देवी की पूजा करते थे। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर देवी ने उन्हें दर्शन दिए। इसी घटना के बाद से पुरुषों द्वारा स्त्री रूप में देवी की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई। श्रद्धालु मानते हैं कि इस प्रकार की पूजा देवी को प्रसन्न करती है।
मंदिर में आने वाले भक्तों का विश्वास है कि देवी की स्त्री रूप में पूजा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी। यह अटूट आस्था हर साल हजारों पुरुष श्रद्धालुओं को चमायाविलक्कू उत्सव की ओर आकर्षित करती है। यह अनुष्ठान केरल की संस्कृति में भक्ति और परंपरा का अद्वितीय संगम है।



















