Morning Scene: सुबह का नजारा

एक मखमली सुबह का नजारा, जब चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है और सूरज की किरणें धरती पर बिखरती हैं, यह सब कुछ एक अद्भुत अनुभव होता है। पवन की हल्की आहट, मुर्गे क
एक मखमली सुबह का नजारा, जब चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है और सूरज की किरणें धरती पर बिखरती हैं, यह सब कुछ एक अद्भुत अनुभव होता है। पवन की हल्की आहट, मुर्गे की कुकड़ू कू और सूखे पत्तों की सरसराहट, यह सब मिलकर एक सुखद वातावरण का निर्माण करते हैं। लेकिन क्या हम यह सब कुछ अब भी महसूस कर पाते हैं? क्या अब भी माँ की चाय की खुशबू, दादी की पूजा का माहौल, पापा का काम पर जाना और भाई का साइकिल चलाना हमारे जीवन का हिस्सा है? दादाजी का हंसकर भाई को साइकिल ठीक करना, गुड़िया की शादी की तैयारी और गुड्डे को दूल्हा बनाना, ये सब बातें अब कहीं खो गई हैं। पहले की तरह अब हम नमक-मिर्ची की सब्जी बनाते हुए खुशी से नाचते और गीत गाते नहीं हैं। क्या यह सब अब केवल यादों में रह गया है?
समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। अखबारों में दीदी का खो जाना, फिर उसे ढूंढकर नई रेसिपी बनाना, छोटी का अपनी माँ से चोटी कराना, माँ का उसे नई बातें सिखाना, ये सब बातें अब हमारी दिनचर्या का हिस्सा नहीं रह गई हैं। क्या हम अब भी उन पुरानी यादों को जी पाते हैं? क्या हम अब भी उस समय को वापस ला सकते हैं जब जीवन सरल और खुशहाल था? यह सोचने का विषय है कि क्या हम अपनी पुरानी परंपराओं और खुशियों को फिर से जिंदा कर सकते हैं।



















