Heritage site in Delhi: हुमायूं के बनवाए पुराने किले का बुर्ज गिरा, क्या खतरे में है दिल्ली का इतिहास?

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) देशभर में 3,600 से अधिक राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की देखरेख करता है, लेकिन विडंबना यह है क
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) देशभर में 3,600 से अधिक राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की देखरेख करता है, लेकिन विडंबना यह है कि उसके मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित दिल्ली के ऐतिहासिक पुराने किले का एक महत्वपूर्ण बुर्ज समय पर संरक्षण नहीं मिलने के कारण ढह गया। यह बुर्ज झील की ओर स्थित है और पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान इसका आधे से अधिक ऊपरी हिस्सा गिर चुका है। हाल ही में, इसी बुर्ज का एक और हिस्सा गिर गया है, जिससे इसकी स्थिति और भी गंभीर हो गई है। एएसआइ मुख्यालय ने इस मामले में लापरवाही से इनकार किया है और कहा है कि तीन साल पहले कुछ कार्य किए गए थे। इसे बचाने के लिए प्लास्टिक के तिरपाल से ढका गया है, और वर्षा बंद होने पर इसका संरक्षण कार्य शुरू करने की योजना है। इस बुर्ज में पिछले एक दशक से दरारें बढ़ रही थीं, और पांच वर्ष पहले इसके संरक्षण के लिए विस्तृत सर्वे भी कराया गया था। 2023 में मरम्मत कार्य शुरू करने की योजना थी, लेकिन आवश्यक धनराशि की कमी के कारण बड़े स्तर पर काम नहीं हो सका। एएसआइ के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि यदि समय पर इसका संरचनात्मक मजबूती का कार्य कराया गया होता, तो यह ऐतिहासिक बुर्ज आज सुरक्षित रहता। अब इसके मूल स्वरूप में पुनर्निर्माण संभव होगा या नहीं, इस पर भी संशय बना हुआ है। पुराने किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में मुगल सम्राट हुमायूं द्वारा शुरू कराया गया था और बाद में इसे शेर शाह सूरी द्वारा विकसित किया गया। यह किला दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इस किले की लंबी विशाल प्राचीर और तीन प्रवेश द्वार हैं। मस्जिद, बावली और पुरातात्विक अवशेष इसे दिल्ली की बहुस्तरीय विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने किले की घटना केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है। राजधानी में कई अन्य धरोहरें भी जर्जर हालत में हैं। इनमें पुराने किले के सामने स्थित शेर शाह सूरी गेट, तुगलक काल की सबसे बड़ी मस्जिदों में शामिल दक्षिण दिल्ली की बेगमपुरी मस्जिद, उत्तरी दिल्ली का ऐतिहासिक त्रिपोलिया गेट और मंगी ब्रिज आदि शामिल हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि नियमित संरचनात्मक ऑडिट, समय पर फंड उपलब्ध कराना और वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों का उपयोग ही इन ऐतिहासिक धरोहरों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का एकमात्र प्रभावी उपाय है। पुराने किले के बुर्ज का गिरना इसी लापरवाही की एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। इस घटना ने न केवल दिल्ली के ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि हमारी धरोहरों की देखभाल में कितनी लापरवाही बरती जा रही है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ये धरोहरें केवल इतिहास की किताबों में ही सीमित रह जाएंगी।



















