Amarnath Yatra Waste Management: अमरनाथ यात्रा 2026 का 300 मीट्रिक टन कचरा, कैसे काम करता है 'स्वाहा' का मॉडल?

श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा इस वर्ष भी बालाटाल और पहलगाम दोनों मार्गों से सुचारु रूप से जारी है। 3 जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा, जो 57 दिनों तक चलने वाली है
श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा इस वर्ष भी बालाटाल और पहलगाम दोनों मार्गों से सुचारु रूप से जारी है। 3 जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा, जो 57 दिनों तक चलने वाली है, अब अपने अंतिम चरण में है। इस यात्रा में 30 जुलाई तक साढ़े चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। इस वर्ष लगभग 300 मीट्रिक टन ठोस कचरा इकट्ठा किया गया है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से निपटाया गया है। यह नाजुक हिमालयी क्षेत्र में सरकार की 'ग्रीन पहल' की सफलता को दर्शाता है। यात्रा के दौरान सफाई अधिकारियों ने सफाई का शानदार रिकॉर्ड बनाए रखा है, जिससे यह यात्रा आध्यात्मिक रूप से समृद्ध और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनी हुई है।
यात्रा के दौरान मार्गों पर जमा हो रहे कचरे को वैज्ञानिक तरीकों से निपटान किया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई तक 291.72 मीट्रिक टन ठोस कचरा इकट्ठा किया गया है। इस कचरे में बालटाल रूट से 191.29 मीट्रिक टन और पहलगाम रूट से 100.43 मीट्रिक टन शामिल है। सफाई कर्मचारियों ने 30 जुलाई को बालटाल से 7.7 मीट्रिक टन और पहलगाम से 1.3 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया। तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के बावजूद, सफाई कर्मचारियों ने कचरे को तुरंत इकट्ठा करने और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने का काम किया। यह सफाई व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाता है और श्रद्धालुओं की संतुष्टि को भी।

















