Bank Account Audit Required: सभी विभागाध्यक्षों को देना होगा बैंक खातों का 5 साल का हिसाब

हरियाणा सरकार ने 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की सीबीआई जांच के चलते एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के सभी विभागाध्यक्षों से पिछले पांच वर्षों के बैंक खा
हरियाणा सरकार ने 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की सीबीआई जांच के चलते एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के सभी विभागाध्यक्षों से पिछले पांच वर्षों के बैंक खातों का विवरण मांगा गया है। यह जानकारी वित्त विभाग को एक सप्ताह के भीतर हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध करानी होगी। इस कदम का उद्देश्य घोटाले की जांच में पारदर्शिता लाना और वित्तीय अनियमितताओं को रोकना है। घोटाले में शामिल आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस और कोटक महिंद्रा बैंक के संदर्भ में आठ विभागों का नाम सामने आया है। इस मामले में तीन आईएएस अधिकारियों सहित लगभग एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारी जेल में हैं। ऐसे में सरकार ने सभी विभागों से रिपोर्ट तलब की है ताकि स्थिति का सही आकलन किया जा सके।
वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे 2021-22 से 2025-26 तक की जानकारी निर्धारित प्रोफार्मा में प्रस्तुत करें। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए यह बताना होगा कि 31 मार्च तक कुल कितने डीडीओ बैंक खाते सक्रिय थे। इसके अलावा, इन खातों में वित्तीय वर्ष के दौरान कितना खर्च हुआ और 31 मार्च को खातों में कितनी राशि शेष थी, इसका भी ब्योरा देना होगा। सरकार ने विशेष रूप से उन खातों की जानकारी मांगी है, जिनमें कोई खर्च नहीं हुआ है। यह कदम वित्तीय प्रबंधन में सुधार लाने और अनियमितताओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
वित्त विभाग ने 50 प्रतिशत से कम खर्च वाले डीडीओ बैंक खातों, 50 प्रतिशत से लेकर 99 प्रतिशत तक खर्च वाले खातों और 100 प्रतिशत खर्च वाले डीडीओ बैंक खातों की जानकारी भी मांगी है। इसके साथ ही, ऐसे खातों की संख्या, संबंधित डीडीओ का विभाग, उनका पदनाम और नाम, बैंक का नाम, बैंक खाता नंबर और वित्त वर्षों के दौरान 31 मार्च को मौजूद क्लोजिंग बैलेंस की डिटेल भी मांगी गई है। सरकार इस पांच साल की अवधि में डीडीओ खातों में हुए लेन-देन और शेष राशि का तुलनात्मक रिकॉर्ड तैयार करवा रही है। यह कदम न केवल वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने में भी सहायक सिद्ध होगा।
















