Bill to Prevent Disrespect of 'Vande Mataram': वंदे मातरम् के अनादर को रोकने वाला विधेयक राज्यसभा से पास

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अनादर को रोकने वाला विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित हो गया है। यह विधेयक अब गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक के अंतर
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अनादर को रोकने वाला विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित हो गया है। यह विधेयक अब गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक के अंतर्गत वंदे मातरम् को जन-गण-मन के समान सम्मान दिया जाएगा। यदि कोई जानबूझकर इसे गाने से रोकता है या बाधा डालता है, तो उसे अपराध माना जाएगा और इसके लिए तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने हंगामा किया, जिसके बाद वे वाकआउट कर गए। राज्यसभा में इस विधेयक पर लगभग एक घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बीजेडी की सुलता देव, शिवसेना की ज्योति नागनाथ और आरपीआइ के केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भाग लिया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण विधेयक का सम्मान करेगा। इसमें जन-गण-मन को गाने से जानबूझकर रोकने पर सजा का प्रावधान है, लेकिन राष्ट्रगीत के लिए ऐसी सुरक्षा नहीं थी। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से अब राष्ट्रगीत भी इसी दायरे में आ जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि वंदे मातरम् को जन-गण-मन के समान सम्मान दिया जाएगा। हालांकि, 1971 में बनाए गए कानून में इसे शामिल नहीं किया गया था। केंद्रीय मंत्री राय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह वंदे मातरम् के प्रति आपत्ति रखती है और तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् के विरोध का उद्देश्य उन लोगों को खुश करना है जो भारत तेरे टुकड़े होने का नारा देते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान एक साथ बजाए जाएं, तो वंदे मातरम् के सभी छह पद पहले गाए जाने चाहिए। इस विधेयक के पारित होने से वंदे मातरम् को एक नई पहचान और सुरक्षा मिलेगी, जो कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के लिए महत्वपूर्ण है।


















