Government Assurance on Bravery Award: पूर्व पुलिस अधिकारी को वीरता पुरस्कार देने का मामला, केंद्र ने 7 अगस्त तक समाधान का दिया आश्वासन

नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह 2003 में एक अभियान के दौरान दो डकैतों को मार गिराने वाले पूर्व
नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह 2003 में एक अभियान के दौरान दो डकैतों को मार गिराने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार प्रदान करने के मामले में 7 अगस्त तक एक सकारात्मक समाधान प्रस्तुत करेगी। यह मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस रुख पर नाराजगी जताई, जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश का पालन नहीं किया गया था, जिसमें चौहान को यह पुरस्कार देने का निर्देश दिया गया था। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर महादेवन की पीठ के समक्ष हुई।
ग्वालियर जिले के घाटीगांव पुलिस स्टेशन के एसएचओ रहे विवेक सिंह चौहान ने 2003 में एक गांव में डकैतों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया था, जिसमें दो डकैत मारे गए थे और चौहान स्वयं भी घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए 29 जुलाई तक का समय दिया था। इस दौरान, सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई 7 अगस्त को सूचीबद्ध की जाए। उन्होंने कहा कि वह इस पर काम कर रहे हैं और कोई समाधान निकलेगा।
चौहान की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को बताया कि वीरता पुरस्कार हर साल 14-15 अगस्त को घोषित और प्रदान किए जाते हैं, इसलिए मामले को 7 अगस्त से आगे नहीं टाला जाना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने 20 जुलाई के आदेश में कहा था कि आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। इस पर पीठ ने कहा कि सालिसिटर जनरल ने अनुरोध किया है कि मामले को 7 अगस्त तक स्थगित किया जाए और उस तारीख तक वह इस समस्या का सकारात्मक समाधान लेकर आएंगे। इसके बाद, मामले को 7 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।


















