Political Experiment Ahead: बीजेपी-अकाली दल का नया गठबंधन क्या लाएगा बदलाव?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हाल की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मुलाकात ऐसे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हाल की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने ठिकानों की पुनर्समीक्षा कर रहे हैं। इस मुलाकात के अगले दिन सुखबीर बादल ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बीजेपी और अकाली दल के बीच की पुरानी बर्फ अब पिघलने लगी है। हालांकि, औपचारिक गठबंधन की घोषणा अभी दूर है, लेकिन दोनों दलों की गतिविधियाँ यह दर्शाती हैं कि उनका संवाद केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है।
शिरोमणि अकाली दल, जो कभी पंजाब की राजनीति का केंद्रीय स्तंभ था, अब राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। 2022 के विधानसभा चुनावों में केवल तीन सीटें जीतना, उसकी कमजोर स्थिति को दर्शाता है। अकाली दल की सबसे बड़ी चुनौती उसके पारंपरिक सामाजिक गठबंधन का टूटना है। ग्रामीण सिख मतदाता एक हिस्से ने पार्टी से दूरी बना ली है, और युवा पीढ़ी भी उससे भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं रही है। पंथक राजनीति में भी अब उसे निर्विवाद नेतृत्व प्राप्त नहीं है। अमृतपाल सिंह और
















