Bribery Case in Padrauna: उद्योग एवं उद्यम सेंटर का जूनियर असिस्टेंट 5000 घूस लेते गिरफ्तार

पडरौना से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत दिए गए ऋण की सब्सिडी के बदले एक कनिष्ठ सहायक को पांच हजार रुपये की घूस लेते हुए एंटी
पडरौना से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत दिए गए ऋण की सब्सिडी के बदले एक कनिष्ठ सहायक को पांच हजार रुपये की घूस लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ा। यह घटना शुक्रवार को हुई, जब गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम ने जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के कार्यालय में छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कनिष्ठ सहायक शैलेश कुमार कुशवाहा ने एक व्यक्ति से सब्सिडी खाते में पैसे भेजने के लिए घूस मांगी थी। यह मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित अमन कश्यप ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। अमन ने अपनी पत्नी के नाम पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत नौ लाख रुपये का ऋण लिया था और सब्सिडी की राशि उसके खाते में नहीं पहुंची थी। इस पर उन्होंने जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र में जाकर जानकारी ली थी।
अमन कश्यप, जो कप्तानगंज कस्बे के मंगलबाजार निवासी हैं, ने बताया कि जब उन्होंने सब्सिडी की स्थिति के बारे में पूछा, तो कनिष्ठ सहायक ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए उनसे पांच हजार रुपये की मांग की। अमन ने जब अपने परिचितों से इस बारे में चर्चा की, तो उन्हें पता चला कि शैलेश कुमार ने कई अन्य लोगों की सब्सिडी भी रोक रखी है। इसके बाद अमन ने एंटी करप्शन टीम को इस मामले की जानकारी दी और टीम ने योजना बनाई कि वे कनिष्ठ सहायक से पैसे देने के लिए मिलेंगे। दोपहर सवा 12 बजे अमन ने उद्योग केंद्र कार्यालय में जाकर कनिष्ठ सहायक को पैसे देने का प्रयास किया।
लगभग ढाई बजे जब अमन ने कनिष्ठ सहायक को पैसे दिए, तभी एंटी करप्शन टीम ने निरीक्षक रामबहादुर पाल के नेतृत्व में उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को रवींद्रनगरधूस थाने ले जाया गया। शिकायतकर्ता की तहरीर पर पुलिस ने कनिष्ठ सहायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई में निरीक्षक शिव मनोहर यादव, सुबोध कुमार, हेकां. प्रदीप कुमार, अल्पना, कां. रितेश, अंगद, राजन, वीरेंद्र और रमेश शामिल थे। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे यह संदेश जाता है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा घूस लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।















