Political Turmoil in Bankipur: बांकीपुर में बड़ा उलटफेर या BJP की वापसी?

पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और अब सभी 25 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। सभी की नजरें 3 अगस्त को हो
पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और अब सभी 25 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। सभी की नजरें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि इस प्रतिष्ठित सीट पर जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है। मतदान समाप्त होने के बाद से राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है। भाजपा, जन सुराज और राजद, तीनों प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज ने प्रशांत किशोर और राजद ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। इस बार का मुकाबला इन्हीं तीनों के बीच माना जा रहा है।
इस उपचुनाव में मतदान प्रतिशत को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जहां 41.39 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं उपचुनाव में यह घटकर 34.03 प्रतिशत रह गया है। लगभग सात प्रतिशत की कमी ने राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की चिंता बढ़ा दी है। कम मतदान के बाद विभिन्न राजनीतिक समीकरण और संभावनाएं सामने आने लगी हैं। इसी बीच आए कुछ एग्जिट पोल ने चुनावी मुकाबले की तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। पॉलिटिकल रिसर्च एजेंसी जनमत पोल्स के एग्जिट पोल में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई गई है। एजेंसी के अनुसार उन्हें 49 से 52 प्रतिशत तक वोट मिलने का अनुमान है। सर्वे में भाजपा दूसरे स्थान पर दिखाई गई है, जिसमें भाजपा को 34 से 36 प्रतिशत और राजद को 9 से 10 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
डीवी रिसर्च के एग्जिट पोल में भी प्रशांत किशोर को बढ़त मिलने का दावा किया गया है। इस सर्वे में प्रशांत किशोर को 43 प्रतिशत, जबकि भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 39 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। एक अन्य एजेंसी पोल पंडित ने भी प्रशांत किशोर को बड़ी जीत का अनुमान जताया है, जिसमें उन्हें 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने की संभावना है। हालांकि सभी एग्जिट पोल प्रशांत किशोर को बढ़त दिखा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वास्तविक मुकाबला अभी भी भाजपा के पक्ष में जा सकता है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जैसे कि कम मतदान की स्थिति में संगठित कैडर वोट और मजबूत बूथ प्रबंधन निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और बूथ स्तर का नेटवर्क माना जाता है। इसके अलावा, बांकीपुर विधानसभा लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। अब इन अनुमानों और एग्जिट पोल की वास्तविकता का पता 3 अगस्त को मतगणना के साथ ही चलेगा।















