Caste Panchayats Control Marriage: प्रेम पर जातीय पंचायतों का पहरा, इतना आसान नहीं मियां-बीवी बनना

विवाह-शादी केवल लड़का-लड़की के राजी होने से नहीं होते। इसके लिए कई कानूनी और सामाजिक बाधाएं होती हैं। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत सपिंडी विवाह अवैध माने जाते हैं
विवाह-शादी केवल लड़का-लड़की के राजी होने से नहीं होते। इसके लिए कई कानूनी और सामाजिक बाधाएं होती हैं। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत सपिंडी विवाह अवैध माने जाते हैं। इसका मतलब है कि यदि वर और वधू खून के रिश्ते में हैं, तो उनकी शादी मान्यता प्राप्त नहीं है। हाल ही में पानीपत में एक वर-वधू को गांव में घुसने नहीं दिया गया क्योंकि उनकी शादी सगोत्री थी। गांव वालों का कहना था कि वधू को बहन या बेटी मानें या बहू, यह स्पष्ट नहीं था। इस तरह के विवाहों के खिलाफ समाज में कई तरह की अड़चनें हैं। खासकर जाट समाज में सगोत्री विवाह को एकदम से नकारा जाता है। समाज विज्ञानी रणबीर सिंह फोगाट के अनुसार, भारत में विवाह संबंध केवल लड़का-लड़की के राजी होने से नहीं होते। इसके लिए शास्त्रीय नियम, सामाजिक परम्पराएं, और आधुनिक कानूनों का भी प्रभाव होता है। सपिंडी विवाहों पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सगोत्री विवाहों को समाज द्वारा नकारा जाता है। जाटों में विवाह संस्कार की पद्धति वैदिक रीति से है, और इस परंपरा का पालन करना अनिवार्य है। हरियाणा में जाटों के बीच सगोत्री विवाह के मामलों की कोई ट्रैकिंग नहीं होती, जिससे उनके जीवन के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता। कानून कुछ समय तक सुरक्षा दे सकता है, लेकिन दीर्घावधि के लिए नहीं। विवाह संबंधों में खून के रिश्ते का अर्थ है कि लड़का-लड़की अपने माता-पिता की तरफ से तीन पीढ़ियों के कुल में विवाह संबंध नहीं बना सकते। पानीपत के मामले में वर-वधू दोनों सगोत्री थे, जिससे गांव में अड़चनें उत्पन्न हुईं। फोगाट के अनुसार, जाटों में विवाह संबंधों के लिए गोत्र का पालन आवश्यक है। ऐसे मामलों में समाज में निंदा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। सगोत्री विवाह से जन्मे बच्चों के रिश्तों को लेकर भी समस्याएं होती हैं। मथुरा में सीनियर एडवोकेट चौधरी नरेंद्र सिंह ने बताया कि हिंदू समाज में सगोत्री विवाह को सामाजिक मान्यता नहीं मिलती। यह प्रथा भारत के अन्य देशों में भी मौजूद है। हालांकि, अब यह प्रतिबंध बहुत कड़े नहीं रह गए हैं। खेतिहर समाज में विवाह के लिए दूर के गांवों में शादी करने की परंपरा थी। निकट संबंधियों के बीच विवाह से जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए, विवाह संबंधों में सामाजिक और कानूनी मान्यताओं का पालन करना आवश्यक है।
















