CBI Investigation Reveals Corruption in Railway Exam: रेलवे परीक्षा में प्रमोशन के लिए रिश्वत और घूस लेने के लिए दी जाती थी ट्रेनिंग

अहमदाबाद से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जिसमें वेस्टर्न रेलवे में 'स्टाफ वेलफेयर इंस्पेक्टर' (swi) के पद के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन परीक्षा में घूस लेने की ट
अहमदाबाद से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जिसमें वेस्टर्न रेलवे में 'स्टाफ वेलफेयर इंस्पेक्टर' (SWI) के पद के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन परीक्षा में घूस लेने की ट्रेनिंग देने का मामला उजागर हुआ है। सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ है कि परीक्षा पास करने के लिए उम्मीदवारों को विशेष रूप से तैयार किया जाता था। इस घोटाले का संचालन एक सीनियर रेलवे अधिकारी की पत्नी द्वारा किराए पर ली गई कमर्शियल जगह पर किया जाता था, जहां उम्मीदवारों को नकल करने, रेलवे अधिकारियों से मदद लेने और विजिलेंस की पूछताछ का सामना करने के तरीके सिखाए जाते थे। सीबीआई ने पश्चिमी रेलवे के सतर्कता विभाग की शिकायत पर इस मामले की जांच शुरू की, जिसमें 16 मार्च, 2024 को आयोजित कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में कई सीनियर रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा के समय लोन वितरण में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीदवारों को परीक्षा से ठीक पहले एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी से लोन लेने की सलाह दी गई थी, जिससे प्रमोशन की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। स्टाफ वेलफेयर इंस्पेक्टर (SWI) के पद पर प्रमोशन के लिए प्रति उम्मीदवार 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की मांग की गई थी। इस घोटाले में शामिल 100 उम्मीदवारों में से चार रेलवे कर्मचारियों ने 87.67% से 90.33% तक का उच्च स्कोर हासिल किया, और इन सभी ने परीक्षा से ठीक पहले लोन लिया था। उनके खातों में एटीएम से नगदी निकालने और रिश्तेदारों के जरिए पैसों के लेनदेन के सबूत भी मिले हैं।
इस मामले की जांच में यह भी पाया गया है कि परीक्षा निर्धारित समय से करीब दो घंटे देरी से शुरू हुई और यह सर्वर पर दो दिनों से अधिक समय तक सक्रिय रही। जांचकर्ताओं ने यह भी बताया कि सर्वर पर AnyDesk जैसे रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया गया था, जिससे परीक्षा समाप्त होने के बाद भी सर्वर को बाहरी रूप से एक्सेस किए जाने की आशंका जताई गई है। यह मामला रेलवे में भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है और सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होता है कि इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
















