Chandigarh Administration Issues: चंडीगढ़ में अफसर ज्यादा, काम में लेटलतीफी; सांसद तिवारी ने साधा निशाना

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने हाल ही में लोकसभा में चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन पर आरोप लगा
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने हाल ही में लोकसभा में चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन पर आरोप लगाया कि शहर की अधिकांश प्रशासनिक समस्याओं की जड़ 'ओवर-गवर्न्ड और अंडर-सर्व्ड' स्थिति है। तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ में जरूरत से अधिक वरिष्ठ नौकरशाह होने के बावजूद प्रशासनिक परिणाम संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने लोकसभा में गृह मंत्रालय से पूछे गए प्रश्न के उत्तर का हवाला देते हुए बताया कि चंडीगढ़ के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 11 और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 7 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद, वर्तमान में 12 आईएएस और 9 आईपीएस अधिकारी तैनात हैं, जिनमें से कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। तिवारी ने इस स्थिति को चंडीगढ़ की समस्याओं का मूल कारण बताया है।
तिवारी ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि 1414 वर्ग किलोमीटर के इस शहर में स्वीकृत संख्या से भी अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने चंडीगढ़ को 'ब्यूरोक्रेटिक पार्किंग लॉट' करार देते हुए कहा कि यहां अधिकारियों की भरमार है, लेकिन आम जनता को अपेक्षित सेवाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने पड़ोसी जिलों मोहाली और पंचकूला का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जिलों का प्रशासन केवल एक-एक उपायुक्त (डीसी) और एक-एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के नेतृत्व में सुचारु रूप से चल रहा है, जबकि चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद निर्णय प्रक्रिया धीमी है। तिवारी ने यह भी कहा कि 'कोई आश्चर्य नहीं कि यहां कोई काम समय पर पूरा नहीं होता।'
















