Construction of New Courts in Delhi: ढाई साल में केवल 20% काम पूरा, जजों और वकीलों को करना होगा इंतजार

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली की अदालतों में कोर्ट रूम और वकीलों के चैंबर की कमी को दूर करने के लिए चल रहे निर्माण कार्य में गति लाने की आवश्यकता है। शास्त्री
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली की अदालतों में कोर्ट रूम और वकीलों के चैंबर की कमी को दूर करने के लिए चल रहे निर्माण कार्य में गति लाने की आवश्यकता है। शास्त्री पार्क, रोहिणी और कड़कड़डूमा में बहुमंजिला अदालत इमारतों का निर्माण कार्य ढाई साल में केवल 20 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ते मामलों के मद्देनजर एक आधुनिक न्यायिक ढांचे का निर्माण करना है, जिससे वकीलों और न्यायाधीशों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इन नई इमारतों में अतिरिक्त कोर्ट रूम, वकीलों के चैंबर, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 600 करोड़ रुपये है, जो कि न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इन परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन वर्तमान प्रगति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि समयसीमा के भीतर काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है। जजों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अदालतों में काम की गति को बढ़ाने की आवश्यकता है। हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर एक बैठक की, जिसमें उम्मीद जताई गई कि आने वाले समय में काम में तेजी आएगी। सूत्रों के अनुसार, पूर्व सरकार द्वारा फंड समय पर नहीं मिलने के कारण भी निर्माण कार्य में देरी हुई है।
















