Preparation to Make Delhi a Low Emission Zone: दिल्ली को Low Emission Zone बनाने की तैयारी, 156 एंट्री प्वाइंट और 500 पेट्रोल पंपों पर लगेंगे ANPR कैमरे

नई दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लेते हुए, सरकार ने दिल्ली को न्यूनतम उत्सर्जन क्षेत्र में परिवर्तित करने की योजना बनाई है। सर्दियों के दौरान,
नई दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लेते हुए, सरकार ने दिल्ली को न्यूनतम उत्सर्जन क्षेत्र में परिवर्तित करने की योजना बनाई है। सर्दियों के दौरान, पीएम 2.5 के कुल उत्सर्जन में लगभग एक-चौथाई हिस्सा वाहनों से होता है, जो कि राजधानी में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इस समस्या को हल करने के लिए, शहर की सीमाओं पर 156 प्रवेश द्वारों और 500 पेट्रोल पंपों पर आटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। ये कैमरे न केवल वाहनों की पहचान करेंगे, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर रखने में भी मदद करेंगे। इसके साथ ही, डिजिटल टोलिंग प्रणाली को भी लागू किया जाएगा, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाने और शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को अनिवार्य करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
दिल्ली-एनसीआर को कम उत्सर्जन वाला क्षेत्र बनाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और राहगीरी फाउंडेशन द्वारा आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने एक रोडमैप प्रस्तुत किया। इस दौरान, सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य डा. विरिंदर शर्मा ने बताया कि पूरे एनसीआर में एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे, जो वाहन डेटाबेस और फास्टैग टोलिंग प्रणाली से जुड़े होंगे। ये कैमरे बीएस-1 से बीएस-4 श्रेणी के वाहनों की पहचान कर सकेंगे, जिससे यातायात बाधित किए बिना पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की वसूली में मदद मिलेगी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने बताया कि उत्सर्जन कम करने के लिए आगामी बीएस-7 मानदंडों को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे पर फास्टैग व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा और पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर रोड टैक्स में छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वाणिज्यिक वाहन कुल वाहनों का केवल तीन प्रतिशत हैं, लेकिन ये कुल वाहन उत्सर्जन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा उत्पन्न करते हैं। इंटरनेशनल एनर्जी ट्रांजिशन प्लेटफार्म की संस्थापक महुआ आचार्य ने कहा कि दीर्घकालिक बदलाव के लिए सिर्फ सब्सिडी पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुराने वाहनों को बदलने के लिए लक्ष्य तय करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने सरकारी और संस्थागत वाहनों को पहले इलेक्ट्रिक में बदलने की सिफारिश की है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
















