Court Hearing in Ayodhya: चढ़ावा चोरी मामले में सुभाष ने पेश किया बैंक लेनदेन का ब्योरा

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने गुरुवार को विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष अपने पेंशन खाते में ह
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने गुरुवार को विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष अपने पेंशन खाते में हुए सभी लेनदेन का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने अदालत में यह स्पष्ट किया कि उनके पेंशन खाते में किसी भी प्रकार की संदिग्ध राशि नहीं है और सभी लेनदेन वैध हैं। सुभाष ने अपनी आपत्ति में विवेचक की आख्या पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जिसके चलते अभियोजन पक्ष ने जवाब देने के लिए समय मांगा। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि तीन अगस्त निर्धारित की है। सुभाष श्रीवास्तव ने जेल में रहते हुए 18 जुलाई को अपने पेंशन खाते से निकासी पर लगी रोक को हटाने के लिए न्यायालय में अर्जी दी थी। उन्होंने कहा कि खाता सीज होने के कारण उनके परिवार की दवा-इलाज और बिजली बिल जैसे आवश्यक खर्चों में कठिनाई आ रही है। उनका पेंशन खाता उनके परिवार के लिए जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है।
इस अर्जी पर विवेचक आशुतोष तिवारी ने 21 जुलाई को अपनी आख्या प्रस्तुत की थी, जिसमें उन्होंने सीजर की कार्रवाई को विवेचना का हिस्सा बताया था। हालांकि, न्यायालय ने 23 जुलाई को विवेचक की आख्या को संतोषजनक नहीं मानते हुए 27 जुलाई को स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके बाद, 27 जुलाई को न्यायालय ने सुभाष की पेंशन राशि को निकालने की अनुमति प्रदान कर दी, जो कि जून 2026 में उनके खाते में अंतरित हुई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई थी।
गुरुवार को सुभाष के बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में यह तर्क प्रस्तुत किया कि विवेचक ने अपनी आख्या में यह स्पष्ट नहीं किया है कि पेंशन खाते में जमा कौन-सी धनराशि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण से संबंधित है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जानबूझकर यह नहीं बता रही है कि पेंशन खाता सीज करने के बाद न्यायालय को कब सूचित किया गया। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 45 बिंदुओं में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें खाते में जमा प्रत्येक राशि का स्रोत, तिथि और कारण क्रमवार बताया गया। इसके अलावा, 30 हजार रुपये की नकद एंट्री के संबंध में भी अधिवक्ता ने जानकारी दी कि यह राशि एक मुकदमे के सिलसिले में अधिवक्ता की फीस के लिए अन्य माध्यम से पेंशन खाते में भेजी गई थी।
















