Court Ruling on Rape Accomplices: दुष्कर्म के दौरान पहरा देने वाला या पीड़िता को पकड़ने वाला भी मुख्य आरोपी जितना ही दोषी: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म के दौरान यदि कोई व्यक्ति पहरा देता है या पीड़िता को पकड़कर मुख्य आरोपित की मदद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म के दौरान यदि कोई व्यक्ति पहरा देता है या पीड़िता को पकड़कर मुख्य आरोपित की मदद करता है, तो वह भी भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 34 के तहत उतना ही दोषी माना जाएगा जितना कि वह व्यक्ति जो वास्तविक दुष्कर्म करता है। यह निर्णय रामपुर के एक 42 वर्ष पुराने दुष्कर्म मामले में दिया गया, जिसमें न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने सुभाष सिंह और शेर सिंह की आपराधिक अपील को खारिज करते हुए उनकी पांच वर्ष की कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह आवश्यक नहीं है कि हर आरोपित ने स्वयं दुष्कर्म किया हो, बल्कि यदि किसी ने साझा मंशा से अपराध को अंजाम देने में सहयोग किया है, तो वह भी समान रूप से जिम्मेदार होगा।
इस मामले में अभियोजन के अनुसार, 14 मार्च 1984 को रामपुर के टांडा थाना क्षेत्र के बदली गांव में दो महिलाएं जंगल में सूखे पत्ते बीनने गई थीं। वहां पहले से मौजूद पांच लोगों ने उन्हें घेर लिया और गड्ढे में ले जाकर अलग-अलग दुष्कर्म किया। इस दौरान सुभाष सिंह और शांति ने एक पीड़िता का मुंह और हाथ दबाकर रखा, जबकि प्रीतम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। दूसरी पीड़िता के साथ पूरन ने दुष्कर्म किया। शेर सिंह बाहर खड़ा होकर पहरा देता रहा और किसी के आने की सूचना अपने साथियों को देता रहा। घटना के दिन ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पीड़िताओं ने तुरंत ही न्याय की मांग की।
















