Cyber Fraud in Azamgarh: अंगूठा क्लोनिंग कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, सरगना गिरफ्तार

आजमगढ़ में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पुलिस ने अंगूठा क्लोनिंग के जरिए एईपीएस (आधार आधारित भुगतान प्रणाली) का उपयोग कर ठगी करने वाले
आजमगढ़ में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पुलिस ने अंगूठा क्लोनिंग के जरिए एईपीएस (आधार आधारित भुगतान प्रणाली) का उपयोग कर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर सेल और गंभीरपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान रंजीतपट्टी मुहम्मदपुर निवासी सद्दाम के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ पहले से गोकशी और गैंग्स्टर एक्ट समेत छह से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बताया कि 11 जुलाई को प्रतिबिंब पोर्टल पर मिली सूचना के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों और एटीएम हॉटस्पॉट की जांच की जा रही थी। इस जांच के दौरान दयालपुर गांव के 19 वर्षीय यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से बायोमेट्रिक मशीन, पीओएस मशीन, कूटरचित अंगूठा क्लोन, कई एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री बरामद की गई। पूछताछ में यह पता चला कि यश अपने साथी सद्दाम के साथ मिलकर साइबर ठगी की धनराशि विभिन्न बैंक खातों में मंगाता था। इसके बाद बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और पीओएस मशीन के माध्यम से रकम निकालकर कमीशन काटने के बाद साइबर अपराधियों तक पहुंचा दी जाती थी। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने सोमवार को मुखबिर की सूचना पर रानीपुर-रजमों मोड़ से सद्दाम को गिरफ्तार किया।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि सद्दाम कोटिला में जनसेवा केंद्र का संचालन करता था। उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ-साथ अन्य लोगों के अंगूठों के भी क्लोन तैयार कर रखे थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम निकालने में किया जाता था। अब तक इस गिरोह द्वारा की गई साइबर ठगी की रकम लगभग पांच लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान और ठगी की रकम के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। इस मामले में पुलिस ने यह भी बताया कि साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें ताकि ऐसे अपराधियों पर काबू पाया जा सके। इस तरह की ठगी से बचने के लिए लोगों को अपने व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक विवरण साझा न करने की सलाह दी गई है।
















