Water Crisis in Delhi: 7200 करोड़ की नई पाइपलाइन योजना से उम्मीद जगी

दिल्ली में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बन चुकी है, विशेषकर गर्मियों के दौरान। पानी की बर्बादी के कारण यह संकट और भी बढ़ जाता है। यमुना नदी के साथ-साथ हरियाणा से
दिल्ली में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बन चुकी है, विशेषकर गर्मियों के दौरान। पानी की बर्बादी के कारण यह संकट और भी बढ़ जाता है। यमुना नदी के साथ-साथ हरियाणा से मुनक नहर की दो शाखाओं, कैरियर लाइन चैनल (सीएलसी) और दिल्ली सब ब्रांच (डीएसबी), के माध्यम से पानी दिल्ली तक पहुंचता है। हालांकि, इन नहरों से पानी की बर्बादी की समस्या भी उत्पन्न होती है। डीएसबी नहर पुरानी और कच्ची है, जिसके कारण इसमें रिसाव होता है, जिससे दिल्ली को कम मात्रा में पानी मिल पाता है। इस समस्या के समाधान के लिए नहर के स्थान पर पाइपलाइन से पानी लाने की योजना बनाई गई है। हरियाणा सरकार से इस परियोजना के लिए अनुमति मिल चुकी है और इसके लिए लगभग 7200 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।
पहले, हरियाणा से पानी केवल डीएसबी नहर के माध्यम से ही मिलता था, लेकिन रिसाव के कारण होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पक्की नहर, कैरियर लाइन चैनल (सीएलसी), का निर्माण किया गया। इसके लिए दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपये दिए थे। इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच विवाद भी रहा, लेकिन अदालत के निर्देश पर हरियाणा ने 2014 से इस नहर के माध्यम से दिल्ली को उसका पूरा हिस्सा देने की प्रक्रिया शुरू की। इससे द्वारका, बवाना और ओखला के जल उपचार संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) को चालू किया गया, जिससे लगभग 600 क्यूसेक पानी दिल्ली पहुंचता है।
















