Explainer: ई20 पेट्रोल पर क्यों मचा है देशभर में बवाल, कब शुरू हुआ विवाद और अब तक क्या-क्या हुआ?

ई20 पेट्रोल के विवाद ने देशभर में हलचल मचा दी है, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बयानों की प्रमुखता रही है। गडकरी ने पहले बयान मे
ई20 पेट्रोल के विवाद ने देशभर में हलचल मचा दी है, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बयानों की प्रमुखता रही है। गडकरी ने पहले बयान में कहा था कि यदि ई20 से कोई गाड़ी खराब हुई है, तो उसका नाम बताने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञों ने ई20 को सुरक्षित बताया है। इसके बाद, गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका में कहा कि ई20 फ्यूल पॉलिसी की जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क परिवहन मंत्रालय का इस नीति के निर्माण में कोई संबंध नहीं है, जिससे यह सवाल उठता है कि जब वे ई20 के प्रचार में सबसे आगे थे, तो उन्हें जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जा सकता। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्यसभा में स्वीकार किया कि 2005 से 2016 के बीच बने BS-III वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट को बदलने की आवश्यकता हो सकती है। ई20 के उपयोग से माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत की कमी आ सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध अध्ययनों में इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है।
गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ फर्जी और मानहानिकारक सामग्री फैलाई जा रही है। इन पोस्टों में यह दावा किया गया है कि उन्हें ई20 इथेनॉल कार्यक्रम से निजी आर्थिक लाभ हो रहा है। गडकरी ने इन आरोपों को झूठा बताया और कहा कि यह उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने मेटा और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति मांगी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस विवाद के चलते सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों के खिलाफ नागपुर साइबर पुलिस ने कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो ई20 के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे।
















