Farmers unite for land demand: ग्रेटर नोएडा में 10% आबादी भूखंड की मांग को लेकर 44 गांवों के किसान एकजुट

ग्रेटर नोएडा के किसानों ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया, जिसमें 44 गांवों के किसानों ने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड के मुद्दे पर मुख्यमंत्री य
ग्रेटर नोएडा के किसानों ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया, जिसमें 44 गांवों के किसानों ने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की। किसानों का कहना है कि 2010 में हुए समझौते के बाद भी उन्हें अपने हक से वंचित रखा गया है। सिरसा गांव के चौधरी प्रकाश प्रधान ने बताया कि 2010 में मुआवजा वृद्धि और आबादी प्लाट को लेकर हुए आंदोलन में पांच किसानों की जान चली गई थी। यह घटना किसानों के लिए एक बड़ा झटका थी और इसके बाद तत्कालीन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति में प्राधिकरण और किसानों के बीच 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने पर सहमति बनी थी। किसानों का कहना है कि यह सहमति गजराज बनाम यूपी सरकार के मामले में हाई कोर्ट में भी प्रस्तुत की गई थी, जहां कोर्ट ने इस समझौते के आधार पर आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जो किसान कोर्ट नहीं आए हैं, उनके बारे में प्राधिकरण को स्वयं निर्णय लेना है।
किसानों का आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन सीईओ ने किसानों से कोर्ट न जाने का शपथ-पत्र लेकर सभी को 10 प्रतिशत प्लाट देने का आश्वासन दिया था। लेकिन 2016 में सपा सरकार के दौरान 10 प्रतिशत प्लाट का प्रस्ताव भेदभावपूर्ण तरीके से निरस्त कर दिया गया। इस दौरान 64.7 प्रतिशत मुआवजा सभी किसानों को दिया गया, लेकिन 10 प्रतिशत प्लाट का लाभ केवल कोर्ट गए किसानों को देने का निर्णय लिया गया। किसानों का यह भी कहना है कि गैर-याचिकाकर्ता कई किसानों को आर्थिक लेन-देन कर 10 प्रतिशत प्लाट दे दिए गए हैं, जो कि पूरी तरह से अन्याय है।
















