Fake Police Station Case in Meerut: फर्जी पुलिस चौकी का मामला, लाखों की वसूली का खुलासा

मेरठ के मोहकमपुर में एक फर्जी पुलिस चौकी का मामला सामने आया है, जिसमें आरोपितों ने सीओ, एचएसओ, एसओ और दारोगा के रूप में नकली पहचान बनाकर लोगों से पैसे वसूले। पु
मेरठ के मोहकमपुर में एक फर्जी पुलिस चौकी का मामला सामने आया है, जिसमें आरोपितों ने सीओ, एचएसओ, एसओ और दारोगा के रूप में नकली पहचान बनाकर लोगों से पैसे वसूले। पुलिस के अनुसार, इस मामले में वॉकी-टॉकी, फोन-पे रिसीवर बॉक्स, बीट बुक, पुलिस की लाठी और थाने की मोहर जैसे सामान बरामद किए गए हैं, जो आमतौर पर पुलिस चौकी या थाने में ही मिलते हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारी इस फर्जी चौकी के अस्तित्व को मानने से इनकार कर रहे हैं। प्रेस कांफ्रेंस में आरोपितों द्वारा फर्जी चौकी का पर्दाफाश होने का दावा किया गया था, लेकिन महकमे की फजीहत के डर से इसे हनी ट्रैप का मामला बताने का प्रयास किया गया। इसके तहत पुलिस और पत्रकार बनकर वसूली का मामला दर्शाया गया।
पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि आरोपित नकली पुलिस अधिकारियों के रूप में लोगों से पैसे वसूल रहे थे। आरोपितों ने गलत काम करने वालों को मोहकमपुर स्थित अपने कार्यालय में बुलाकर मुठभेड़ का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूले। शाम को दोबारा प्रेस नोट जारी करते हुए पुलिस ने बताया कि हनी ट्रैप गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। एसपी सिटी विनायक भोसले ने स्पष्ट किया कि आरोपित नकली चौकी या थाना नहीं चला रहे थे, बल्कि पुलिस और पत्रकार बनकर लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे।
इस मामले में मुख्य आरोपी शंशाक शर्मा है, जो हरियाणा का निवासी है और आकाश चौधरी के घर पर किराए पर रहता था। शंशाक ने आकाश को फर्जी पुलिस अधिकारी बनने का विचार दिया और फिर रिठानी के राहुल पाल को भी इस गिरोह में शामिल किया। आरोपितों ने आसपास के क्षेत्र में गलत काम करने वालों की सूची तैयार की और रात के समय उनके घरों पर पहुंचकर उन्हें कार में उठाकर मोहकमपुर स्थित कार्यालय में ले जाते थे। वहां परिवार से पैसे वसूलने के बाद उन्हें छोड़ देते थे। बताया जा रहा है कि पिछले छह महीनों में इन तीनों ने 50 लाख रुपये से अधिक की वसूली की है।















