Fraud Case in Lucknow: धोखाधड़ी के 42 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज

लखनऊ। समिट बिल्डिंग में एक कॉल सेंटर के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में जिला जज मलखान सिंह ने 42 आरोपियों की जमानत अर्जियां
लखनऊ। समिट बिल्डिंग में एक कॉल सेंटर के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में जिला जज मलखान सिंह ने 42 आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। इन आरोपियों में शांतनु नंदी, अभिषेक संजय सिंह, दौलानी विनीत, आसिफ, आशुतोष पृथ्वीराज निषाद, शिवम निषाद, अमित कुमार और अन्य शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग जमानत याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने सभी की याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई की और जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की आवश्यकता है। यदि आरोपियों को रिहा किया जाता है, तो साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना बहुत अधिक है। सरकारी वकील ने बताया कि 30 जून को पुलिस को समिट बिल्डिंग में कॉल सेंटर के बारे में सूचना मिली थी, जहां विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिकी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापा मारा और विक्रम सिंह तथा ललित को प्रबंधक के रूप में पकड़ा। इस दौरान अमेरिकी सुपीरियर कोर्ट और फेडरल ट्रेड कमीशन के जाली दस्तावेज भी बरामद हुए।
पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपियों के लैपटॉप से आईबीएम डायलर एप्लिकेशन और अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग नंबर भी मिले। इसके अलावा, बरामद दस्तावेजों पर चीफ जज अनिता जॉसी हेरिंग समेत अन्य अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए। कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग खुद को एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स, फेसबुक, एफटीसी, एफबीआई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे। वे पीड़ितों को यह बताते थे कि उनके बैंक खातों या निजी डेटा के साथ कुछ गड़बड़ हो गई है। इसके बाद, अमेरिकी कोर्ट के फर्जी आदेशों और दस्तावेजों का भय दिखाकर उन्हें पैसे देने के लिए मजबूर करते थे। आरोपियों ने विदेशी नागरिकों से गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य माध्यमों से धन की वसूली की। तलाशी के दौरान पुलिस ने 103 लैपटॉप, 68 आईफोन, 109 मोबाइल फोन सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए। यह मामला न केवल धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे तकनीकी साधनों का दुरुपयोग करके लोगों को ठगा जा रहा है। इस प्रकार के मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।
















