Good News for Railway Employees: दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार के नियमों में बदलाव

प्रयागराज से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने 'दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार' (accident-free service award) के पात्रता नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
प्रयागराज से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने 'दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार' (Accident-Free Service Award) के पात्रता नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस नए स्पष्टीकरण के बाद, देशभर के विभिन्न मंडलों और जोनों में तैनात लाखों रेल कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब गैर-सुरक्षा से जुड़ी छोटी-मोटी विभागीय कार्रवाई या माइनर पेनल्टी के आधार पर कर्मचारियों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से वंचित नहीं किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने यह निर्णय तब लिया जब उन्हें पता चला कि विभिन्न जोनल रेलवे में इस पुरस्कार की पात्रता के लिए नियमों की भिन्न-भिन्न व्याख्याएं की जा रही थीं। इससे पहले, सफाई व्यवस्था, वाणिज्यिक ड्यूटी में मामूली चूक या सामान्य प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी छोटी पेनल्टी मिलने पर भी कर्मचारियों का एक्सीडेंट-फ्री अवॉर्ड रोक दिया जाता था या उसमें कटौती कर दी जाती थी। इस असंगति को लेकर विभिन्न रेल कर्मचारी यूनियनों और संगठनों ने बोर्ड के समक्ष कड़ा ऐतराज जताया था और नियमों में स्पष्टता की मांग की थी। रेलवे बोर्ड ने इस मामले की समीक्षा के बाद कार्यकारी निदेशक (सुरक्षा) अशोक कुमार नाकरा की ओर से नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी को किसी भी प्रकार का गंभीर दंड या मेजर पेनल्टी मिली है, तो वह इस पुरस्कार के लिए पूरी तरह अपात्र रहेगा। वहीं, सुरक्षा से जुड़ी माइनर पेनल्टी के मामले में केवल वही प्रकरण ध्यान में रखे जाएंगे, जिनका सीधा संबंध रेल दुर्घटना, संरक्षा नियमों की अनदेखी या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन से हो। इसके अलावा, गैर-सुरक्षा माइनर पेनल्टी से राहत दी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि सफाई, कमर्शियल ड्यूटी, वेंडर मैनेजमेंट या अन्य प्रशासनिक कार्यों में चूक के चलते दी गई माइनर पेनल्टी को पुरस्कार की पात्रता तय करते समय पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाएगा। इस बदलाव से कर्मचारियों को एक नई उम्मीद मिली है और यह निर्णय उनके लिए एक सकारात्मक संकेत है।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी किया है कि दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार के प्रस्तावों को संसाधित करते समय इन नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य पूरे देश के रेल नेटवर्क में इस नीति के क्रियान्वयन को लेकर एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखना है, ताकि किसी निष्ठावान कर्मचारी का हक न मरे। यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के लिए राहत का कारण बना है, बल्कि इससे रेलवे की कार्यप्रणाली में भी सुधार की उम्मीद की जा रही है। अब कर्मचारियों को अपनी छोटी-मोटी गलतियों के लिए पुरस्कार से वंचित नहीं होना पड़ेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और मनोबल में वृद्धि होगी।
















