Historic Gold Win: सोमन राणा ने शाटपुट में जीता स्वर्ण पदक

गयाजी के लक्खीबाग मोहल्ले के निवासी सोमन राणा ने कामनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष शाटपुट एफ-57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने ग्लासगो
गयाजी के लक्खीबाग मोहल्ले के निवासी सोमन राणा ने कामनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष शाटपुट एफ-57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने ग्लासगो में 13.40 मीटर की दूरी तक थ्रो करके यह उपलब्धि हासिल की। सोमन ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार, कोच, सेना और देशवासियों के विश्वास की जीत है। उनका कहना है कि कठिन समय में परिवार का साथ न होता, तो शायद वह खेल के मैदान तक लौट नहीं पाते। सोमन का बचपन गयाजी के लक्खीबाग मोहल्ले में बीता, जहां उनके पिता फोन बहादुर राणा ने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की शिक्षा और संस्कार पर कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने हमेशा सिखाया कि मेहनत ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है। सोमन का सपना भारतीय सेना में शामिल होना था, जिसे उन्होंने मेहनत से पूरा किया। 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया। इस कठिन समय में उनके परिवार ने उन्हें टूटने नहीं दिया। उनकी पत्नी ने हर कदम पर उनका साथ दिया और उन्हें मानसिक मजबूती प्रदान की। वर्तमान में सोमन पुणे के आर्मी पैरा प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास कर रहे हैं।
सोमन ने 2012 में सेना के पैरा खिलाड़ियों के संपर्क में आने के बाद पैरा एथलेटिक्स को गंभीरता से अपनाया। 2017 से उन्होंने पुणे में नियमित प्रशिक्षण शुरू किया। इस दौरान उनकी पत्नी ने घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली, जबकि उनके पिता ने हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। इस सामूहिक प्रयास का परिणाम यह है कि सोमन ने एशियन पैरा गेम्स में रजत, राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक और अब कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कहा कि यह गोल्ड उनके लिए अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। अब उनका ध्यान पैरालंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर है। सोमन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वह फिर से खड़े हो सकते हैं, तो कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है।















