Guru Purnima Celebrations: शिवधाम में गुरु की कृपा का अमृतवर्षा

वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा, जिसे गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, पर गुरु कृपा की अमृतवर्षा देखने को मिली। इस विशेष अवसर पर देशभर से शिष्य और अनुयायी मठ-मं
वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा, जिसे गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, पर गुरु कृपा की अमृतवर्षा देखने को मिली। इस विशेष अवसर पर देशभर से शिष्य और अनुयायी मठ-मंदिरों, आश्रमों और शिक्षण संस्थाओं में गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित हुए। काशी का हर कोना लघु भारत की तरह नजर आ रहा था, जहां सात समुंदर पार से भी श्रद्धालु आए। इस दिन लगभग 12 लाख शिष्यों ने गुरु का दर्शन और पूजन किया। अघोरपीठ सर्वेश्वरी समूह, क्रीं-कुंड और संत मत अनुयायी आश्रम गड़वाघाट में भीड़ उमड़ी। गुरु पूर्णिमा के दिन, बुद्धादित्य सहित पांच राजयोग के साथ, आश्रमों और मठों में सूरज की पहली किरण के साथ गुरु पूजा के अनुष्ठान आरंभ हुए। पीठाधीश्वरों, महंतों और आचार्यों ने अपने-अपने गुरुओं की प्रतिमा और तैलचित्रों की पूजा की और फिर शिष्यों को दर्शन दिए। अघोर पीठ श्रीसर्वेश्वरी समूह आश्रम में भोर से ही कतारें लग गई थीं। प्रभातफेरी और सर्वेश्वरी ध्वजारोहण के बाद सफलयोनि सद्ग्रंथ का पाठ हुआ। शिष्यों और सेवादारों ने सुबह-सुबह साफ-सफाई और श्रमदान किया। इसके बाद अघोरपीठ के पीठाधीश्वर बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने अपने गुरुदेव परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु के आसन का विधिवत पूजन किया। इसके बाद शिष्यों और अनुयायियों को 7:30 बजे से दर्शन दिए गए। लाखों की संख्या में लोगों ने गुरु का दर्शन और पूजन किया। विभिन्न स्थानों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं की कतार दोपहर तक लगी रही। इस महायज्ञ के बाद भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और चिकित्सा शिविर में निशुल्क उपचार भी हुआ। शाम को गोष्ठी में गुरु का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बाबा कीनाराम स्थल क्रीं-कुंड में भी अटूट गुरु भक्ति देखने को मिली। यहां भी दोपहर तक लंबी कतार लगी रही। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। रवींद्रपुरी मार्ग के दोनों तरफ कतारें लगी थीं। शिष्य और अनुयायी दर्शन कर कृतार्थ हुए। दर्शन पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा, जिसमें भजन-संध्या में भजनों की गंगा प्रवाहित हुई। बाबा गौतम राम ने आशीर्वचन में कहा कि यदि हम अपने अवगुणों को छोड़कर गुरु के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा अर्पित करते हैं, तो हमारे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। आश्रम परिसर और बाहर मेले जैसा माहौल बना रहा। गढ़वाघाट आश्रम में पीठाधीश्वर स्वामी सरनानंद महाराज के दर्शन के लिए अनुयायियों की भीड़ रही। आश्रम के पूर्व पीठाधीश्वर स्वामी आत्मविवेकानंद परमहंस और स्वामी हरशंकरानंद परमहंस की समाधियों में विधिवत पूजन-अर्चन और आरती की गई। सरनानंद महाराज ने कहा कि मानव जीवन की श्रेष्ठता उसके कर्मों से सिद्ध होती है। यदि हम अपने कर्म श्रेष्ठ रखें, तो प्रारब्ध भी श्रेष्ठ होगा।

















