Irrigation dispute leads to violence: सिंचाई विवाद में पिता-पुत्र घायल

गांव खेड़ी जालब में सिंचाई को लेकर हुए एक विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया, जिसमें एक पिता और उसके पुत्र को गंभीर चोटें आई हैं। यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे हु
गांव खेड़ी जालब में सिंचाई को लेकर हुए एक विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया, जिसमें एक पिता और उसके पुत्र को गंभीर चोटें आई हैं। यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे हुई, जब हरिकेश अपने खेत में सिंचाई के लिए गया था। वहां, गांव के चार व्यक्तियों ने उसे पानी तोड़ने से रोका और उसके साथ मारपीट की। आरोपियों में जयबीर, उसकी पत्नी सुमन, और उनके बेटे संयम और गौरव शामिल हैं। हरिकेश ने पुलिस को बताया कि जब वह नाली से पानी तोड़ने लगा, तो इन चारों ने उसे रोका और उसके साथ बर्बरता की। जयबीर ने कस्सी से उसके सिर पर वार किया, जबकि अन्य ने लाठियों से उसे पीटा। इस हमले में हरिकेश गंभीर रूप से घायल हो गया। जब हरिकेश के पिता गुलाब सिंह ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो उन पर भी आरोपियों ने हमला किया। दोनों घायलों को पहले नागरिक अस्पताल नारनौंद ले जाया गया, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हिसार रेफर कर दिया गया।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि हरिकेश के बयान के आधार पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, गुलाब सिंह की स्थिति इतनी गंभीर है कि वह बयान देने में असमर्थ हैं। मेडिकल रिपोर्ट में गुलाब सिंह को तीन और हरिकेश को दो चोटें दर्ज की गई हैं, जो इस हमले की गंभीरता को दर्शाती हैं। इस प्रकार की हिंसा से गांव में तनाव बढ़ गया है और लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंचाई के मुद्दे पर इस तरह की हिंसा अस्वीकार्य है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
गांव खेड़ी जालब में इस घटना ने न केवल परिवार को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे गांव में भय और चिंता का माहौल बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई के विवादों को सुलझाने के लिए पंचायत स्तर पर बातचीत और समझौते की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में हिंसा का सहारा लेना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गांवों में सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए संवाद और सहिष्णुता की आवश्यकता है।
















