Islamic NATO के 3 देश Vs भारत: हथियारों की ताकत में कौन है मजबूत?

दुनिया की राजनीति में जब भी किसी नए सैन्य गठबंधन की चर्चा होती है, तो इसका प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा और रणनीति
दुनिया की राजनीति में जब भी किसी नए सैन्य गठबंधन की चर्चा होती है, तो इसका प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा और रणनीति को प्रभावित करता है। वर्तमान में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे कई मुस्लिम देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के कारण 'इस्लामिक NATO' का मुद्दा फिर से चर्चा में आया है। इस बीच, भारत के सामने यह सवाल उठ रहा है कि यदि यह सहयोग और मजबूत होता है, तो क्या भारत को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? इसी संदर्भ में भारत और इस संभावित समूह की सैन्य ताकत की तुलना की जा रही है।
सैनिकों की संख्या, लड़ाकू विमान, टैंक, परमाणु हथियार और रक्षा बजट जैसे आंकड़ों के आधार पर यह विश्लेषण किया जा रहा है कि भारत अकेले कितना मजबूत है और तीन मुस्लिम देशों की संयुक्त ताकत इसके मुकाबले कहां खड़ी है। कुछ मामलों में भारत अकेला ही भारी पड़ता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इन तीनों देशों की संयुक्त ताकत भारत से आगे दिखाई देती है। यही कारण है कि केवल हथियारों की संख्या देखकर किसी देश की सैन्य क्षमता का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
















