Kedarnath Yatra Resumes: रुद्रप्रयाग में मौसम साफ होते ही केदारनाथ यात्रा दोबारा शुरू

रुद्रप्रयाग से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह मौसम में सुधार होने के बाद केदारनाथ यात्रा को पुनः आरंभ कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रा मार्ग की स्थित
रुद्रप्रयाग से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह मौसम में सुधार होने के बाद केदारनाथ यात्रा को पुनः आरंभ कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रा मार्ग की स्थिति का आकलन करते हुए लगभग 800 श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम के लिए रवाना किया। यह यात्रा चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई है, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। हालांकि, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रा मार्ग के कई संवेदनशील स्थानों पर मलबा हटाने का कार्य अभी भी जारी है, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रुद्रप्रयाग में पिछले 24 घंटे में 3.00 मिमी, ऊखीमठ में 17.50 मिमी और जखोली में 8.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस वर्षा के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। अलकनंदा नदी का जलस्तर 627.50 मीटर और मंदाकिनी नदी का जलस्तर 626.50 मीटर दर्ज किया गया है, जो क्रमशः खतरे के निशान 627.00 मीटर और 626.00 मीटर से ऊपर है। इस स्थिति को देखते हुए नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों द्वारा लोगों को नदी के तटों से दूर रहने की अपील की गई है।
गुरुवार को लगातार वर्षा और भूस्खलन के कारण केदारनाथ यात्रा सुरक्षा कारणों से स्थगित कर दी गई थी, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और अन्य सुरक्षित स्थानों पर रोका गया था। प्रशासन ने इन श्रद्धालुओं के लिए भोजन, आवास और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं। अब मौसम में सुधार के बाद, यात्रा को पुनः शुरू किया गया है। यात्रा मार्ग पर जेसीबी मशीनों और संबंधित विभागों की टीमें मलबा हटाने और मार्ग को सुरक्षित बनाने में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने यह भी बताया कि यात्रा पूरी तरह से मौसम और मार्ग की स्थिति पर निर्भर करेगी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लिए जाएंगे। वर्तमान में जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग के दो स्थान, राज्य राजमार्ग के तीन, लोक निर्माण विभाग के तीन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सात और एनपीसीसी के दो मार्ग अभी भी बंद हैं।
















