Kerala Government's Decision: नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस होंगे

केरल सरकार ने नीट परीक्षा के विरोध में हुए प्रदर्शनों से संबंधित सभी मामलों को वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक
केरल सरकार ने नीट परीक्षा के विरोध में हुए प्रदर्शनों से संबंधित सभी मामलों को वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को तिरुअनंतपुरम में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री वी डी सतीशान द्वारा किए गए अनुरोधों के आधार पर लिया गया है। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कई युवा संगठनों और राजनीतिक दलों ने राज्यभर में प्रदर्शन किए थे, जिसके चलते विभिन्न स्थानों पर मामले दर्ज किए गए थे। गृह मंत्री ने कहा कि हमें इन मामलों को वापस लेने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अनुरोधों को मेरे पास भेजा और मैंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि इन मामलों में आगे कोई कार्रवाई न की जाए। यह कदम उन युवाओं के प्रति सहानुभूति दर्शाता है जो नीट परीक्षा के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरे थे।
इस निर्णय के बाद, राज्य में नीट परीक्षा के विरोध में उठाए गए कदमों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। कई युवा संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। प्रदर्शनकारियों ने नीट परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की थी। गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हमेशा युवाओं की आवाज सुनने के लिए तत्पर है और उनके मुद्दों को गंभीरता से लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय केवल प्रदर्शनों से संबंधित मामलों तक सीमित है और इससे अन्य कानूनी मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस बीच, विशेष एनआइए अदालत ने कन्नूर में एक इमारत से अटैचमेंट हटाने का आदेश दिया है, जिसमें प्रतिबंधित पीएफआइ का कार्यालय पाया गया था। न्यायाधीश पी.के. मोहनदास ने कन्नूर स्थित चालीलेथ प्रम्बिल इमारत के मालिकों द्वारा दायर अपील पर यह आदेश पारित किया। इस आदेश के बाद, संपत्ति की कुर्की को चुनौती देने वाले मालिकों को राहत मिली है। यह मामला भी राज्य में राजनीतिक हलचल का कारण बना हुआ है, क्योंकि यह प्रतिबंधित संगठन से संबंधित है। इस प्रकार, केरल सरकार के निर्णय और न्यायालय के आदेश ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ लाया है।
















