Political Drama in Parliament: पंकज चौधरी ने कांग्रेस-सपा पर साधा निशाना

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर संसद परिसर में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर संसद परिसर में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई अन्य नेताओं के साथ मिलकर दान पेटिका में चढ़ावा दिया। पप्पू यादव ने दान पेटिका लेकर भागने का नाटक किया, जिससे भाजपा के नेता भड़क गए। प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने इस घटना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की जनता ऐसे जोकरों को संसद में भेजने के लिए नहीं चुनती। उनका यह बयान विपक्ष के प्रति उनकी नाराजगी को दर्शाता है। पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि पप्पू यादव और राहुल गांधी जैसे नेता, जो इस नाटक में शामिल हैं, ने सनातन धर्म का अपमान किया है। उन्होंने इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन भी बताया और कहा कि घटिया राजनीति को देश की जनता देख और समझ रही है। यह स्पष्ट है कि विपक्ष का यह स्वभाव बन गया है कि वे सनातन को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
पंकज चौधरी ने आगे कहा कि यह कोई साधारण राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह सनातन और संत परंपरा के साथ छल करने का प्रयास है। उन्होंने भगवान राम के करोड़ों श्रद्धालुओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, इस तरह के नाटक केवल राजनीतिक लाभ के लिए किए जा रहे हैं, जो कि पूरी तरह से अस्वीकार्य है। राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा ने भी इस प्रदर्शन को सनातन धर्म का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए की जा रही हैं और इससे समाज में अस्थिरता बढ़ सकती है। यह घटना न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाली है।
इस पूरे मामले ने संसद में एक बार फिर से राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला अब एक नई दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। पंकज चौधरी का यह बयान इस बात का संकेत है कि भाजपा इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और वह विपक्ष के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का राजनीतिक परिणाम क्या निकलता है और क्या यह आगामी चुनावों पर भी असर डालेगा। विपक्ष को चाहिए कि वह इस तरह की हरकतों से बचें और संसद की गरिमा को बनाए रखें।
















