Legal Battle Over Citizenship: 60-Year-Old Woman's Struggle in Kolkata Court

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। नागरिकता के मुद्दे पर एक 60 वर्षीय महिला, फतिमा बीबी, की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वह खुद को भारतीय नागरिक बताती हैं, लेकिन दस्तावेजों
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। नागरिकता के मुद्दे पर एक 60 वर्षीय महिला, फतिमा बीबी, की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वह खुद को भारतीय नागरिक बताती हैं, लेकिन दस्तावेजों की कमी और सरकारी फाइलों के गायब होने के कारण उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है और गृह मंत्रालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। फतिमा का कहना है कि उनका जन्म 1965 में हुगली जिले में हुआ था और उनके माता-पिता भारतीय नागरिक थे। बचपन में, वह अपने पिता के साथ पाकिस्तान चली गईं, जहां उन्होंने लगभग 13 साल बिताए। 1981 में, वह स्थायी रूप से भारत लौट आईं और यहां शादी की, जिसके बाद उनके दो बच्चे भी हुए, जो भारतीय नागरिक हैं।
फतिमा ने 2003 में भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था और सभी आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे। लेकिन, वर्षों बीत जाने के बावजूद, उनके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। यह जानकर हैरानी होती है कि गृह मंत्रालय अब उस आवेदन की मूल फाइल भी नहीं ढूंढ पा रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान फतिमा को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत मामला दर्ज किया गया और वह कुछ समय के लिए जेल में रहीं, लेकिन हाल ही में उन्हें जमानत मिल गई।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सवाल उठाया कि यदि फतिमा खुद को भारतीय साबित कर देती हैं, तो उन्हें हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा—भारत या पाकिस्तान? अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला साधारण नहीं है और लापता फाइलों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फतिमा की कहानी न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे नागरिकता के मुद्दे पर कानूनी प्रक्रियाएं और सरकारी लापरवाहियां लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
















