Nepal's Political Stance: पीएम बालेन शाह ने हिंदू राष्ट्र पर स्पष्ट किया रुख

नेपाल, जो भारत का पड़ोसी देश है, वर्तमान में गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। सुनसरी जिले से शुरू हुआ साम्प्रदायिक तनाव अब मधेश प्रदेश के कई हिस्सों में
नेपाल, जो भारत का पड़ोसी देश है, वर्तमान में गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। सुनसरी जिले से शुरू हुआ साम्प्रदायिक तनाव अब मधेश प्रदेश के कई हिस्सों में फैल चुका है, जिसके कारण नेपाल पुलिस, एपीएफ और नेपाली सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कई शहरों में कर्फ्यू लागू किया गया है। इस कठिन समय में, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना के पक्ष में नहीं है और न ही राजशाही की वापसी का समर्थन करती है। बालेन शाह ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दा भी जुड़ता है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में यह उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार फेडरल व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वे इसे मजबूत करने का संकल्प लेते हैं।
शुक्रवार को मधेश-केंद्रित राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक में, प्रधानमंत्री शाह ने लगभग दो घंटे तक चर्चा की। इस बैठक में जनता समाजवादी पार्टी के महासचिव रामकुमार शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में नहीं हैं। तराई/मधेश में हिंदू राष्ट्र की मांग का अलग संदर्भ है, जबकि पहाड़ में इसका अलग अर्थ है।' उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली से राजशाही का मुद्दा जुड़ जाता है, जिससे संघीय व्यवस्था कमजोर होगी। प्रधानमंत्री ने मधेशवादी नेताओं को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री शाह ने यह भी कहा कि जिन लोगों को जांच में दोषी पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित पक्ष के साथ हुए सभी समझौतों को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'कुछ तत्व सांप्रदायिक दंगे भड़का कर अपने स्वार्थ पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की ताकि तराई/मधेश में उत्पन्न सांप्रदायिक तनाव को समाप्त किया जा सके। बैठक में मधेश-केंद्रित दलों के नेताओं ने गृह मंत्री द्वारा सुनसरी में किए गए समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि पिछली सरकारों ने कई समझौतों को लागू नहीं किया, इसलिए वर्तमान सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए और जनता को वास्तविक परिवर्तन का अनुभव कराना चाहिए।















