Nitin Gadkari and Ethanol: मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ई-20 इथेनॉल
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ई-20 इथेनॉल मिश्रण योजना से उनका कोई संबंध नहीं है। यह बयान एक बार फिर से राजनीति के उस पुरानी कहावत को याद दिलाता है, जिसमें कहा जाता है 'मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू'। जब इथेनॉल के नाम पर वाहवाही लूटने की बात थी, तब गडकरी जी बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते थे। किसानों के हित, आयात बिल में कमी, प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे उनके भाषणों में प्रमुखता से रहते थे। लेकिन अब जब ई-20 पेट्रोल को लेकर आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है, माइलेज में गिरावट और इंजन खराब होने की शिकायतें सोशल मीडिया पर बढ़ रही हैं, तब वे अचानक अपने हाथ झाड़कर कह रहे हैं कि यह योजना पेट्रोलियम मंत्रालय की है, उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह रवैया न केवल राजनीतिक अवसरवादिता का प्रतीक है, बल्कि जनहित के मुद्दों पर जिम्मेदारी से भागने का भी उदाहरण है।
गडकरी लंबे समय से इथेनॉल के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्री के रूप में उन्होंने बार-बार वैकल्पिक ईंधन की वकालत की है। उन्होंने दावा किया कि ब्राजील, अमेरिका और थाईलैंड जैसे देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन बिना किसी समस्या के चल रहा है। उन्होंने 100 प्रतिशत इथेनॉल वाले वाहनों के नियमों की वकालत की और ऑटो कंपनियों को फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके परिवार की चीनी और एग्रो-प्रोसेसिंग कंपनियों का इथेनॉल व्यवसाय से जुड़ा होना भी कोई रहस्य नहीं है। वे इसे स्वीकार करते हैं, हालांकि इसे बहुत छोटा हिस्सा बताते हैं। लेकिन आलोचकों ने इसे हितों के टकराव का मुद्दा बना दिया है। जब योजना सफल दिख रही थी और किसानों को फायदा पहुंचाने का श्रेय लिया जा सकता था, तब गडकरी आगे रहते थे। लेकिन जैसे ही ई-20 के अनिवार्य हो जाने के बाद पुरानी गाड़ियों में समस्याएं सामने आईं, माइलेज में गिरावट साफ महसूस होने लगी और सोशल मीडिया पर आलोचना तेज हुई, वैसे ही वे पीछे हटने लगे हैं।

















