Parliament uproar over education system: राहुल गांधी ने शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026' पर बोलने के लिए खड़े हुए। इस दौरान उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्याओं और पेपर लीक के मामलों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल उठाए। अपने भाषण में उन्होंने शिक्षा के बढ़ते वित्तीय बोझ, परीक्षा प्रणाली में धांधली और संस्थागत कमियों पर पांच महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए, जिससे सदन में हंगामा मच गया। राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी इतनी महंगी हो गई है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने बच्चों की कोचिंग और परीक्षा शुल्क के लिए अपनी जमापूंजी गिरवी रखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जब इतने भारी खर्च के बावजूद पेपर लीक हो जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य को भी प्रभावित करता है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में तीन प्रकार के लोगों का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने 'स्टूडेंट', 'इडियट' और 'अंधभक्त' के रूप में वर्गीकृत किया। उन्होंने कहा कि सच्चा छात्र वह होता है जो सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहता है, जबकि 'इडियट' वे होते हैं जो अपने ज्ञान को लेकर घमंडी होते हैं। 'अंधभक्त' वे लोग हैं जो बिना सोच-विचार के व्यवस्था की कमियों को छिपाते हैं। इस पर सत्ता पक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद उन्होंने परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 150 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब हर परीक्षा का पेपर बिक रहा है, तो परीक्षा प्रणाली में सुधार क्यों नहीं हो रहा है।

















