Parliament uproar over student protests: छात्रों के प्रदर्शन पर संसद में घमासान, नड्डा बोले-आंदोलन करना है तो जेल जाने को तैयार रहे

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई ने संसद में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सरकार और
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई ने संसद में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि जो छात्र राजनीति या आंदोलन का रास्ता चुनते हैं, उन्हें पुलिस की कार्रवाई और हिरासत के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और आंदोलन के दौरान हिरासत में लिया जाना कोई नई बात नहीं है। नड्डा ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि वे भी इमरजेंसी के दौरान एक छात्र नेता थे और उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था। उनका कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के कदम सही हैं और यह सालों से होता आ रहा है।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में देश का लोकतंत्र खतरे में है और आम लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खड़गे ने सवाल उठाया कि जिन पुलिस अधिकारियों ने छात्रों पर बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस विवाद को और हवा तब मिली जब सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने संसद में एक घटना का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की एक टीम छात्र नेता आइशे घोष को गिरफ्तार करने के लिए सीधे कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में घुस गई। ब्रिटास ने कहा कि घोष का केवल इतना कसूर था कि वह जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन में शामिल हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कहा कि घोष के खिलाफ एक पुराना मामला पेंडिंग है।

















