Parliament waste ₹2.5 lakh per minute: संसद में हर मिनट बर्बाद ढाई लाख रुपये, हंगामे से नुकसान

संसद के मानसून सत्र में सांसदों के समय की बर्बादी बढ़ गई है। इस बार हंगामे के कारण सदन में कामकाज बाधित होता रहा है। नीट परीक्षा, छात्रों पर हुई बर्बरता और राम
संसद के मानसून सत्र में सांसदों के समय की बर्बादी बढ़ गई है। इस बार हंगामे के कारण सदन में कामकाज बाधित होता रहा है। नीट परीक्षा, छात्रों पर हुई बर्बरता और राम मंदिर के चंदा चोरी के मुद्दे पर हर दिन चर्चा होती रही, जिससे सदन बार-बार बाधित हुआ। सरकार ने इस हंगामे के बीच कुछ जरूरी विधेयकों को चंद मिनटों में पारित किया है।
पिछले दस दिनों में निचले सदन और उच्च सदन में कामकाज की स्थिति चिंताजनक रही है। संसद का सत्र 27 जुलाई से शुरू हुआ था और अब तक केवल 188.03 मिनट ही कामकाज हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से सदन के कामकाज को बाधित न करने की अपील की है। हालांकि, कार्य मंत्रणा समिति में उठाए गए मुद्दे भी सदन में नहीं पहुंच पाए।
28 जुलाई को लोकसभा में सबसे अधिक 721.2 मिनट कामकाज हुआ था, लेकिन इसके बाद से औसतन 702.37 मिनट हर दिन बर्बाद हुए हैं। दूसरी ओर, राज्यसभा ने दस दिन में 1046 मिनट काम किया है। इस सत्र के दौरान एक दिन में अधिकतम 446 मिनट काम करने का समय रहा है।
पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने संसद में समय की बर्बादी पर टिप्पणी करते हुए बताया कि संसद प्रतिदिन 360 मिनट चलती है और हर मिनट में लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। इससे एक दिन में करीब नौ करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसलिए उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे हंगामा न करें और संसदीय कार्यवाही में शामिल हों।
















