Rally in Ranchi: झारखंड में राहुल गांधी की चुप्पी पर प्रदर्शनकारियों का सवाल

झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र आंदोलन ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर
झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र आंदोलन ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आजतक के संवाददाताओं से बातचीत करते हुए राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए। छात्रों का कहना है कि जब प्रयागराज के छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी ने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज उठाई थी, तो अब झारखंड के छात्रों के आंदोलन पर उनकी चुप्पी क्यों है? एक छात्र ने इस संदर्भ में कहा, 'हबीबी कम टू रांची', जिसका अर्थ है कि अगर राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर ध्यान देते हैं, तो उन्हें रांची आकर यहां के छात्रों की समस्याओं को सुनना चाहिए। छात्रों का यह भी कहना है कि उनकी आवाज को अनसुना करना न केवल अन्याय है, बल्कि यह उनकी लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।
छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के छात्रों की समस्याओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में छात्रों के प्रति संवेदनशील हैं, तो उन्हें रांची आकर यहां के छात्रों की समस्याओं को समझना चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह आंदोलन शिक्षा, रोजगार और अन्य मूलभूत अधिकारों की मांग को लेकर है, जो कि हर छात्र का हक है। छात्रों ने यह भी कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल के प्रति पक्षपाती नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य केवल अपने अधिकारों की रक्षा करना है।
इस आंदोलन ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। छात्रों का कहना है कि अगर राहुल गांधी जैसे नेता उनके समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो यह दर्शाता है कि राजनीतिक दल केवल चुनावी लाभ के लिए छात्रों की समस्याओं का उपयोग करते हैं। छात्रों ने यह भी कहा कि वे अपने मुद्दों को लेकर जागरूक हैं और किसी भी स्थिति में अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। इस आंदोलन के दौरान छात्रों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया है और यह स्पष्ट किया है कि वे अपने हक के लिए किसी भी प्रकार की बलिदान देने के लिए तैयार हैं। अब देखना यह है कि क्या राहुल गांधी इस आंदोलन को लेकर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या फिर यह चुप्पी बनी रहती है।
















