Impact of RLD-BJP Alliance in Western UP: केसी त्यागी बोले- टिकट बंटवारा नहीं बनेगा बाधा

दिल्ली के जंतर मंतर पर cjp के नेतृत्व में हुए आंदोलन का यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, इस पर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राल
दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए आंदोलन का यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, इस पर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद और भाजपा के बीच सीटों को लेकर कोई औपचारिक वार्ता शुरू नहीं हुई है। रालोद नेता केसी त्यागी ने बताया कि उनकी पार्टी जिलों में संगठन को मजबूत कर रही है और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में लगी है। उन्होंने कहा कि बृज प्रदेश, हस्तिनापुर प्रदेश और रूहेलखंड की 85 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां रालोद एनडीए को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पिछला विधानसभा चुनाव रालोद ने सपा गठबंधन के साथ लड़ा था, जिसमें उसके 33 उम्मीदवारों में से आठ ने जीत हासिल की थी। उपचुनाव में खतौली सीट जीतकर रालोद ने अपनी संख्या बढ़ाई थी। 2024 का लोकसभा चुनाव रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा और बिजनौर में युवा उम्मीदवार चंदन चौहान और बागपत से डा. राजकुमार सांगवान ने चुनाव जीते। केसी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी का नारा है 'मजबूत आरएलडी-मजबूत एनडीए' और उन्होंने दावा किया कि सीटों को लेकर भाजपा से कोई विवाद नहीं होगा। समाजवादी पार्टी के महासचिव राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा और भाजपा और रालोद गठबंधन को मुश्किल से 20-22 प्रतिशत जाटों का समर्थन मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने डिंपल यादव के बजाय जयंत चौधरी को राज्यसभा में भेजा था। हरेंद्र मलिक का मानना है कि जाटों का रूझान सपा की ओर है और भाजपा के साथ उनके संबंध सहज नहीं हैं। चौधरी प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा की लोकप्रियता घट रही है और सरकार को डर और खौफ वाली नहीं बल्कि लोगों की पसंद की सरकार बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षाओं के पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर छात्रों का आंदोलन भी भाजपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
















