Shiv Sena's Concerns: नए उद्योगों के दावे, पुराने उद्योग बंद

शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र 'सामन
शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में लोकसभा में पेश किए गए केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं, जिसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां चली गईं। संपादकीय में कहा गया है कि पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं, जबकि नए उद्योग शुरू करने की बातें की जा रही हैं। शिवसेना ने सवाल उठाया है कि जिस शासन में युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जा रहा है, वहां से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है? संपादकीय में यह भी बताया गया कि 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया। पार्टी ने यह भी कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जो कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद, पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा है, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में यह भी कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते। शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए, लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

















