Supreme Court ruling: 19 साल बाद ग्राम पंचायत का हक बहाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक निर्णय में 19 साल बाद गुरुग्राम की 436 बीघा से अधिक भूमि पर ग्राम पंचायत के अधिकार को पुनर्स्थापित किया है। इस
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक निर्णय में 19 साल बाद गुरुग्राम की 436 बीघा से अधिक भूमि पर ग्राम पंचायत के अधिकार को पुनर्स्थापित किया है। इस निर्णय ने 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले को पलट दिया, जिसमें इस भूमि पर निजी स्वामित्व के दावों को मान्यता दी गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले ने ग्राम पंचायत के अधिकारों को बहाल करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह भूमि सामुदायिक संपत्ति के अंतर्गत आती है और इसका स्वामित्व ग्राम पंचायत के पास ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन शामिल थे। उन्होंने अपने 85 पृष्ठों के निर्णय में कहा कि यह भूमि हरियाणा सामुदायिक भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 के तहत 'शामलात देह' के रूप में वर्गीकृत की जाती है। जस्टिस कुमार ने कहा कि यह भूमि विशेष रूप से गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्र के निकट होने के कारण अत्यधिक मूल्यवान है। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने केवल राजस्व रिकार्ड में गांव के पट्टेदारों के नाम दर्ज होने के आधार पर निजी स्वामित्व की मान्यता दी, जो कि गलत था।
















