Supreme Court's Strict Action: हापुड़ के 25 साल पुराने ट्रिपल मर्डर केस पर सख्त कार्रवाई

हापुड़ में 25 वर्ष पुराने पिलखुवा के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच में कथित लापरवाही के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में तत्क
हापुड़ में 25 वर्ष पुराने पिलखुवा के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच में कथित लापरवाही के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में तत्कालीन विवेचक रहे सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा को 15 दिन के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में अनुपालन शपथपत्र दाखिल करते हुए मेहरा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने सिविल सेवा विनियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत कार्रवाई की मंजूरी देते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई वर्ष 2001 के केस क्राइम संख्या 221/2001 और वर्ष 2002 के केस क्राइम संख्या 228/2002 की जांच में सीबीआइ द्वारा इंगित गंभीर कमियों के आधार पर की जा रही है। सरकार ने पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिया है कि मामले में शीघ्र आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला विशेष परिस्थितियों वाला है और इसे अन्य मामलों में नजीर नहीं माना जाएगा।
तत्कालीन विवेचक पूरन सिंह मेहरा को एक अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2001 में दर्ज तिहरे हत्याकांड की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए बिना मात्र 18 दिन के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके अलावा, बरामद रक्तरंजित सामग्री को समय पर फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) नहीं भेजा गया और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज नहीं कराए गए। इन कमियों के कारण अभियोजन प्रभावित हुआ और मामले में आरोपितों को लाभ मिला। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) ने स्थानीय पुलिस की जांच में गंभीर खामियां पाई थीं। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में सीबीआइ को रिपोर्ट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
















