Supreme Court: लिव-इन में रहने वाली महिला को भी मिलेगा IPC 498A का संरक्षण; सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता (ipc) की धारा 498a के दायरे को बढ़ा दिया है। इस निर्णय के अनुसार, लिव-इ
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के दायरे को बढ़ा दिया है। इस निर्णय के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भी इस धारा के तहत संरक्षण मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी पुरुष के साथ लिव-इन में रहती है और यह संबंध 'शादी जैसे रिश्ते' की श्रेणी में आता है, तो ऐसे मामलों में भी पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की गई क्रूरता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जो पारंपरिक विवाह के बंधन में नहीं बंधी हैं लेकिन फिर भी उन्हें मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं, जैसे कि विवाहित महिलाओं को मिलते हैं। न्यायालय ने यह निर्णय उन मामलों के संदर्भ में लिया, जहां महिलाओं को उनके साथी द्वारा शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है। यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं और समाज में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। अदालत ने यह भी कहा कि यह निर्णय न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि समाज में लिव-इन रिलेशनशिप के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारतीय समाज में लिव-इन रिलेशनशिप को एक नई पहचान देगा। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि ऐसे रिश्तों में भी महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए। न्यायालय का यह निर्णय उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं और उन्हें न्याय की आवश्यकता है। यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इससे यह संदेश जाता है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भी समाज में समानता और सुरक्षा का अधिकार है।
















