Violence in 'Parliament Chalo March': नेताओं की भूमिका और फंडिंग की जांच शुरू

नई दिल्ली में 20 जुलाई को काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
नई दिल्ली में 20 जुलाई को काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने संसद घेरने की कोशिश की थी, जिससे देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचाने की गहरी साजिश का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस हिंसा के पीछे राजनीतिक दलों के नेताओं और असामाजिक तत्वों का हाथ था। गृह मंत्रालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को 2019 के दिल्ली दंगों की तर्ज पर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस मामले में स्पेशल सेल द्वारा जांच की जा रही है, जिसमें हर उस व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है जिसने भीड़ को उकसाने में मदद की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की गहन जांच शुरू कर दी है ताकि साजिश के सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस का उद्देश्य एक मजबूत और साक्ष्य-आधारित आरोपपत्र तैयार करना है, जिससे साजिशकर्ताओं को अदालत में सख्त सजा दिलाई जा सके।
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों की मंशा केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि वे संसद भवन तक पहुंचने की योजना बना रहे थे। इस दौरान उपद्रव फैलाकर देश की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचाने की पूरी तैयारी की गई थी। हालांकि, समय पर पुलिस की मुस्तैदी से इस बड़े खतरे को टाल दिया गया। गृह मंत्रालय ने इस मामले की डेली मॉनिटरिंग का जिम्मा अपने हाथ में लिया है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रकार की साजिश को बख्शा न जाए।
















