Historic Test Match: सहवाग ने गॉल में मचाया तूफान, मेंडिस की मिस्ट्री का किया पोस्टमार्टम

अजंता मेंडिस का नाम 2008 के दौर में भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए खौफ का प्रतीक बन गया था। 6 जुलाई 2008 को कराची में खेले गए एशिया कप के फाइनल में, भारतीय टीम ने 2
अजंता मेंडिस का नाम 2008 के दौर में भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए खौफ का प्रतीक बन गया था। 6 जुलाई 2008 को कराची में खेले गए एशिया कप के फाइनल में, भारतीय टीम ने 276 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 76 रन पर दूसरा विकेट खो दिया और पूरी टीम 173 रन पर सिमट गई। इस मैच में मेंडिस ने 8 ओवर में 1 मेडन डालते हुए 13 रन देकर 6 विकेट लिए और भारतीय बल्लेबाजों को ताश के पत्तों की तरह ढेर कर दिया। गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, सुरेश रैना, युवराज सिंह और एमएस धोनी सभी मेंडिस की फिरकी में फंस गए थे।
हालांकि, एक महीने बाद वीरेंद्र सहवाग ने बदला लिया। 31 जुलाई 2008 को गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए टेस्ट मैच में, सहवाग ने 201 रन बनाकर मेंडिस की मिस्ट्री का पोस्टमार्टम कर दिया। इस मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी की और कुल 329 रन बनाए। सहवाग ने 22 चौके और 4 छक्के लगाए, जबकि मेंडिस ने 28 ओवर में 117 रन खर्च करते हुए 6 विकेट लिए।
सहवाग की पारी ने न केवल उन्हें बल्कि सभी बल्लेबाजों को मेंडिस की फिरकी के फंदे से बाहर निकालने का तरीका सिखाया। इस मैच में, श्रीलंकाई टीम 170 रन से हार गई, जिसमें सहवाग का योगदान महत्वपूर्ण था। दूसरी पारी में सहवाग ने 50 रन भी बनाए। भारत की गेंदबाजी में हरभजन सिंह ने 6 विकेट लिए, जबकि अनिल कुंबले ने 3 विकेट लिए। श्रीलंका के लिए दूसरी पारी में मेंडिस ने 4 और मुरलीधरन ने 3 विकेट लिए।
सहवाग की इस ऐतिहासिक पारी ने क्रिकेट प्रेमियों को यह दिखा दिया कि कैसे एक बल्लेबाज की तकनीक और आत्मविश्वास से किसी भी गेंदबाज की मिस्ट्री को हल किया जा सकता है। इस मैच के बाद से सभी बल्लेबाजों ने मेंडिस की फिरकी का सामना करने का तरीका खोज लिया था।















