Explainer: जूडो में कैसे मिलती है जीत? जानिए खेल के नियम और कैसे अस्मिता डे-हर्ष सिंह ने रचा स्वर्णिम इतिहास

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय जूडो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। इस खेल में भारत ने 1990 से लेकर 2022 तक एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीता था, लेकिन इ
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय जूडो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। इस खेल में भारत ने 1990 से लेकर 2022 तक एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीता था, लेकिन इस बार एक ही दिन में दो गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने भारत को जूडो का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण दिलाया। अस्मिता की इस जीत ने न केवल उनके व्यक्तिगत करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि भारतीय जूडो को भी एक नई पहचान दी। यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है और जूडो के प्रति लोगों की रुचि को भी बढ़ाया है। जूडो एक ऐसा खेल है जिसमें तकनीकी कौशल, ताकत और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है। इसे विभिन्न श्रेणियों में खेला जाता है, जिसमें वजन वर्ग के अनुसार प्रतियोगिता होती है। जूडो के नियमों को समझना और उनका पालन करना आवश्यक है ताकि खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को बेहतर बना सकें।
जूडो में जीत के लिए कई महत्वपूर्ण नियम हैं। सबसे पहले, इप्पोन (Ippon) को जीत का सबसे बड़ा अंक माना जाता है। यदि कोई खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को सही तरीके से फेंकता है और सभी शर्तें पूरी करता है, तो उसे इप्पोन मिलता है। इसके अलावा, वाजा-आरी (Waza-ari) भी एक महत्वपूर्ण अंक है, जो तब मिलता है जब थ्रो अच्छा हो लेकिन इप्पोन की सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं। वाजा-आरी तब भी मिलता है जब खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को 10 से 19 सेकंड तक मैट पर दबाकर रखता है। यदि कोई खिलाड़ी दो वाजा-आरी हासिल कर लेता है, तो उन्हें मिलाकर इप्पोन माना जाता है और मुकाबला समाप्त हो जाता है।
















