








राउरकेला से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जहां राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के शोधकर्ताओं ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की
राउरकेला से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जहां राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के शोधकर्ताओं ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित एक स्वचालित प्रणाली का विकास किया है, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सोलर प्लांट की निगरानी और सफाई करने में सक्षम है। इस प्रणाली को 'फेडरेटेड लर्निंग बेस्ड ऑटोनोमस सिस्टम एंड मेथड फॉर मॉनिटरिंग एंड क्लीनिंग सोलर प्लांट' नामक भारतीय पेटेंट भी प्राप्त हुआ है। यह तकनीक न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि रखरखाव की लागत और पानी की बर्बादी को भी कम करेगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रणाली के माध्यम से सौर ऊर्जा के उत्पादन में सुधार होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां धूल और प्रदूषण के कारण उत्पादन में कमी आती है।
इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सौर पैनलों की सफाई को अधिक प्रभावी और कुशल बनाना है। वर्तमान में, सौर पैनलों की सफाई पारंपरिक तरीकों से की जाती है, जो समय और संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती है। एनआईटी की यह प्रणाली धूल, पक्षियों की बीट और अन्य प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं का स्वतः पता लगाने में सक्षम है। यह केवल उन्हीं पैनलों की सफाई करेगी, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है, जिससे पानी और श्रम की बचत होगी। इसके अलावा, यह प्रणाली गोपनीयता-संरक्षित 'फेडरेटेड लर्निंग' पर काम करती है, जिसका अर्थ है कि यह तकनीक प्राथमिक डेटा को किसी केंद्रीय सर्वर पर साझा नहीं करती, जिससे साइबर सुरक्षा और निजता सुनिश्चित होती है।
इस तकनीक का विकास डॉ. अरुण कुमार के नेतृत्व में किया गया है, जिसमें प्रोफेसर बिभूदत्त साहू और अन्य शोधकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डॉ. कुमार का कहना है कि यह प्रणाली रियल-टाइम एज इंटेलिजेंस, स्वचालित दोष पहचान और पूर्वानुमान आधारित रखरखाव को जोड़ती है। इस प्रणाली की लागत-प्रभावशीलता भी उल्लेखनीय है, क्योंकि यह बाजार में उपलब्ध अन्य महंगे विकल्पों की तुलना में अधिक किफायती है। वर्तमान में, इस तकनीक का सफल परीक्षण किया जा चुका है और इसे विभिन्न उपयोगिता-स्तरीय सौर संयंत्रों, स्मार्ट सिटी और रक्षा प्रतिष्ठानों में लागू करने की योजना है। शोध दल अब इसके अगले चरण पर काम कर रहा है, जिसमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित सेंसर से जुड़े हार्डवेयर प्रोटोटाइप का विकास शामिल है। यह नवाचार निश्चित रूप से भारत सरकार के 'राष्ट्रीय सौर मिशन' और 'नेट जीरो' लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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